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02 सितंबर 2010

पूर्व जज नहीं रह सकते आयोग में

लेफ्ट हो या राइट, कोर्ट के अंदर हो या बाहर हर व्यक्ति जजों की आलोचना कर रहा है । यहां तक कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए जज को भी नहीं बख्शा जा रहा है । इसलिए हम अब किसी जज को जांच आयोग या अन्य कमेटियों में नियुक्त नहीं करेंगे। जस्टिस जीएस सिंघवी और एके गांगुली की खंडपीठ ने ये टिप्पणियां करते हुए एक केस में किसी रिटायर जज को मध्यस्थ नियुक्त करने के आग्रह को ठुकरा दिया। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए जज जस्टिस तरुण चटर्जी का नाम लिए बिना खंडपीठ ने कहा कि लोग रिटायर होते ही जजों की निंदा शुरू कर देते हैं । जांच आयोग और समितियों में नियुक्त कर हम उन्हें बेवजह आलोचना का केंद्र नहीं बनाएंगे। एक हफ्ते पूर्व नगालैंड के वकील के एन बालगोपाल ने जस्टिस चटर्जी को असम के साथ सीमा विवाद हल करने के लिए आयोग में नियुक्त करने का विरोध किया था। इससे पूर्व,वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी गुजरात के सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में जस्टिस चटर्जी के आदेश का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जस्टिस चटर्जी का गाजियाबाद पीएफ घोटाले में नाम आया है इसलिए उनके आदेश को वापस लिया जाए। वहीं अब गुजरात की आई पीएस अधिकारी गीता जौहरी ने भी जस्टिस चटर्जी के आदेश को वापस लेने के लिए क्यूरेटिव याचिका दायर की है । उन्होंने भी कहा है कि जस्टिस चटर्जी पीएफ घोटाले नामित थे। इससे पूर्व, कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पीडी दिनाकरन के खिलाफ उनके ही हाईकोर्ट के जज जस्टिस डीवी शैंलेंद्र कुमार ने आदेश पारित कर बेंचें गठित करने का आदेश रोक दिया था। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट को रद्द करना पड़ा(श्याम सुमन,हिंदुस्तान,दिल्ली,2.9.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. जजों पर किसी तरह के पक्षपात या गबन का आरोप लगना ही अपने आप में शर्मनाक है ,जजों को अपना कार्य और जीवन देश के लोगों के सामने पूरी तरह पारदर्शी रखने का प्रयास करना चाहिए और लोभ-लालच से बचना चाहिए...

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