अम्बाला में गवर्नमेंट कालेज लेक्चरर्स ने 5 घंटे की ड्यूटी देकर कालेज को नमस्कार कह दिया। छह घंटे ड्यूटी देने के सरकारी आदेश को उन्होंने अस्वीकार कर दिया। मंगलवार को गवर्नमेंट कालेज छावनी में हुई मीटिंग में घोषणा की गई थी कि पांच घंटे से ज्यादा एक मिनट भी काम नहीं करेंगे।
पिछले कुछ दिनों से तो गवर्नमेंट कालेज छावनी में लेक्चर्स ने छह घंटे डच्यूटी देने के आदेश को मान लिया था, लेकिन मंगलवार को उन्होंने पांच घंटे की हाजिरी दी। कालेज प्रशासन कहता है कि इसका अर्थ ये नहीं कि नियम टूट गया है।
गत दिनों गवर्नमेंट कालेज में लेक्चर्स से छह घंटे की डच्यूटी लेने के आदेश हुए थे। सरकार चाहती थी कि इन कालेजों में टीचर्स अतिरिक्त काम करके काम की गुणवत्ता बढ़ाएं, लेकिन इन आदेशों पर विरोध का स्वर फूट पड़ा।
सरकार के आदेश तो ऐसे उलट पड़े कि पहले से साढ़े पांच घंटे काम कर रहे टीचर्स ने आधा घंटा और कम कर दिया। उक्त कालेज में आयोजित मीटिंग में एक स्वर में सभी ने कहा कि गवर्नमेंट कालेज में टीचर्स से छह घंटे काम लेने का कोई तुक नहीं। कालेज प्रधान डा. कुलदीप ने कहा कि हमने काम के घंटे तय करने के और तरीके सुझाए हैं। मसलन शनिवार की भी छुट्टी दी जाए और अन्य दिनों में 9 से 4 बजे तक डच्यूटी करने को तयार है।
प्रिंसिपल किसकी सुने
यूनियन कहती है कि मौजूदा प्रिंसिपल डा. गुरदेव कार्यकारी पद पर हैं। इस नाते अभी उनकी यूनियन के साथ ही सदस्यता बनती है। अगर वो रेगुलर प्रिंसिपल होते तो उनकी लेक्चर्स यूनियन में सदस्यता का कोई सवाल नहीं था। ऐसे में उन्हे हमारी बात का समर्थन करना चाहिए। उधर प्रिंसिपल डा. गुरदेव बोले, ‘इस समय मैं सरकार का नुमाइंदा हूं। मुझे सरकारी आदेशों और नीतियों को लागू करने का जिम्मा दिया गया है। मैं इस समय आफिशियटिंग चार्ज संभाल रहा हूं।’
(दैनिक भास्कर,अम्बाला,8.9.2010)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।