बिलासपुर हाईकोर्ट ने फार्मेसी कौंसिल का विवाद निराकरण के लिए राज्य शासन को भेजने का आदेश दिया है। जस्टिस एसके अग्निहोत्री की सिंगल बेंच ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे सभी पक्षों को सुनने के बाद प्रकरण का नियमों के अनुसार निराकरण करें।
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद प्रदेश के लगभग 5500 फार्मासिस्टों का पंजीयन न करने और उनके बीच चुनाव न कराने पर रायपुर निवासी मनोहर जेठानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग और स्टेट फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार ने फार्मासिस्टों को पंजीयन प्रमाणपत्र वितरित कर चुनाव के लिए 5 जून 2007 की तारीख तय की लेकिन स्वास्थ्य विभाग और फार्मेसी कौंसिल रजिस्ट्रार ने 932 पंजीकृत फार्मासिस्टों को अलग-अलग कारण बताते हुए चुनाव में भाग लेने से रोकते हुए सिर्फ 4 हजार 668 फार्मासिस्टों के बीच ही चुनाव कराया।
इस चुनाव को विधि विरुद्ध बताते हुए श्री जेठानी ने फार्मेसी कौंसिल रजिस्ट्रार के समक्ष 26 अप्रैल 2007 को आपत्ति प्रस्तुत कर 932 फार्मासिस्टों को भी चुनाव में शामिल करने का निवेदन किया। उच्चधिकारियों द्वारा इस पर कार्रवाई न करने पर मनोहर जेठानी, दुर्ग निवासी दिनेश दत्त दुबे व विमला जोसफ ने फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
कोर्ट के आदेश अनुसार याचिकाकर्ताओं ने स्वास्थ्य सचिव के समक्ष फार्मेसी एक्ट की धारा- 24 के तहत चुनाव याचिका प्रस्तुत की गई। इस याचिका की सुनवाई के बाद सचिव ने चुनाव को शून्य घोषित कर दिया। इस आदेश के खिलाफ निर्वाचित सदस्य कमल चंद्राकर, तोषण चंद्राकर, ए रामाराव, राजेंद्र कुमार और विजय जेठानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें उक्त निर्वाचन आदेश के पूर्व प्रस्तुत याचिका में पक्षकार बनाकर सुनवाई का अवसर दिया जाना था।
इन सभी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव के 17 अगस्त 2009 को पारित आदेश निरस्त कर मामला निराकरण के लिए राज्य शासन के समक्ष भेजने का आदेश दिया। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील योगेशचंद्र शर्मा, आरके केशरवानी ने पैरवी की(दैनिक भास्कर,बिलासपुर,8.9.2010)।
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