मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

16 सितंबर 2010

ईपीएफ पर अब 9.5 फीसदी ब्याज

संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बहुत अच्छी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के ट्रस्टी बोर्ड ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) पर ब्याज की दर को एक प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है। चालू वित्त वर्ष 2010-11 के लिए अब कर्मचारियों को उनकी रिटायरमेंट बचत के लिए साढ़े नौ प्रतिशत ब्याज मिलेगा। अब तक यह दर साढ़े आठ फीसदी थी। ईपीएफओ के केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड की बुधवार को हुई बैठक में यह फैसला हुआ। पिछले पांच साल से ईपीएफ पर ब्याज की दर साढ़े आठ प्रतिशत पर बनी हुई थी। एक प्रतिशत वृद्धि के इस ताजा फैसले से संगठित क्षेत्र के करीब 4.71 करोड़ कर्मचारियों को फायदा होगा। ब्याज दर में एक प्रतिशत की वृद्धि से ईपीएफओ पर 1,600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन माना जा रहा है कि इस अतिरिक्त राशि के भुगतान को लेकर ईपीएफओ को कोई दिक्कत नहीं आएगी। इसकी वजह यह है कि संगठन के पास सस्पेंस इंटरेस्ट अकाउंट में 1,731 करोड़ रुपये की राशि का अधिशेष मौजूद है। ट्रस्टी बोर्ड के चेयरमैन व श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुए इस फैसले से जल्दी ही वित्त मंत्रालय को अवगत करा दिया जाएगा। आम तौर पर कर्मचारी भविष्य निधि पर मिलने वाली ब्याज दर की सिफारिश वित्त मंत्रालय स्वीकार कर लेता है। ब्याज दर में बढ़ोत्तरी की अधिसूचना वित्त मंत्रालय ही जारी करता है। कर्मचारी संगठन ईपीएफ की ब्याज दर बढ़ाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे थे। महंगाई दर में लगातार वृद्धि के बाद कर्ज और बैंक जमाओं पर ब्याज की दरें बढ़ने से ट्रस्टी बोर्ड पर भी दबाव बढ़ रहा था। आम तौर पर ईपीएफ पर ब्याज की दर बैंकों की लंबी अवधि की फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दरों से एक से डेढ़ प्रतिशत अधिक रही है। इसलिए बैंकों की एफडी रेट बढ़ने के बाद अब ईपीएफ पर भी ब्याज दर बढ़ाना जरूरी हो गया था। वर्तमान में सरकारी और निजी बैंकों की पांच साल की एफडी पर ब्याज दर 7 व 8 प्रतिशत के बीच चल रही है। इससे पहले फरवरी, 2005 में भविष्य निधि पर मिलने वाली ब्याज की दर को एक बार साढ़े नौ प्रतिशत किया गया था। हालांकि उसी साल दिसंबर में वित्त मंत्रालय की सिफारिश पर इसे घटाकर साढ़े आठ प्रतिशत कर दिया गया। उसके बाद से अब तक ईपीएफ पर ब्याज की दर में कोई बदलाव नहीं हुआ था(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,16.9.2010)।

1 टिप्पणी:

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।