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17 सितंबर 2010

परीक्षा पैटर्न से राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रभावित

‘मदस विवि की डिग्री में 13 सिक्युरिटी फीचर्स हैं!’ ‘सिर्फ 28 पृष्ठों की उत्तरपुस्तिका में विद्यार्थी पूरा पेपर कैसे हल कर देते हैं?’ ‘उत्तर पुस्तिकाओं पर ही प्रश्नपत्र छपा है!, बहुत बढ़िया।’ यह कहना है राजस्थान विश्वविद्यालय (आरयू) के पांच सदस्यीय शिष्टमंडल का जिसने गुरुवार को एमडीएस यूनिवर्सिटी के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नपत्र मुद्रण प्रक्रिया को जाना और सदस्य इससे काफी प्रभावित हुए।

शिष्टमंडल अपने विश्वविद्यालय में भी इसे लागू करना चाहता है। इसके लिए राजस्थान यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो एडी सावंत ने उन्हें अजमेर भेजा था। शिष्टमंडल में आरयू के परीक्षा कन्वीनर श्याम गोपाल शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. एके पीएल रैगर, उपकुलपति (परीक्षा) एक्यू खान और उपकुलपति (गोपनीय) डॉ. एके शर्मा शामिल थे। एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. भागीरथ सिंह ने बताया कि शिष्टमंडल ने यहां प्रयोग किए जा रहे परीक्षा पैटर्न, प्रश्न पत्र पैटर्न और पद्धतियों की जानकारी ली। उन्हें यह अच्छा लगा कि यहां 3 किस्म की उत्तर पुस्तिकाएं बनाई जाती हैं जो गोपनीता की दृष्टि से सुरक्षित हैं क्योंकि इनमें मोनोग्राम कोडिंग होती है।

हमारे यहां 40 पृष्ठों की उत्तरपुस्तिका

दल ने बताया कि उनके यहां 40 पृष्ठों की उत्तर पुस्तिकाएं काम में ली जाती हैं, फिर भी विद्यार्थी और सप्लीमेंट्री मांगते हैं। जबकि यहां 28 पृष्ठों में प्रश्नपत्र हल करना होता है। ये कॉपियां सिली हुई और इन्हीं में प्रश्नपत्र भी होते हैं। दल ने बताया कि यह राजस्थान में ऐसा सिर्फ अजमेर में हो रहा है और जल्द अन्य जगहों पर भी इसे फॉलो किया जाएगा। आरयू में हर साल 10 हजार के करीब कॉपियां गुम जाती हैं, लेकिन यहां गुमशुदगी शून्य है।

मार्कशीट के नमूने लिए

दल ने मार्कशीट और डिग्री के नमूने भी लिए। आरयू की डिग्री में एक भी सिक्युरिटी फीचर नहीं होता, जबकि यहां 13 सिक्युरिटी फीचर होते हैं। वीसी प्रो. सिंह ने बताया कि इनमें से 6 फीचर्स को सिर्फ मशीन में स्कैन से देखा जा सकता है।

दल ने टेंडर और गोपनीयता की प्रक्रिया भी जानी

दल ने उत्तरपुस्तिकाओं के लिए टेंडर निकालने और फर्म को ऑर्डर देने की प्रक्रिया भी समझी। कुलपति ने बताया कि अन्य विश्वविद्यालय अब इस पैटर्न को फॉलो करेंगे(दैनिक भास्कर,अजमेर,17.9.2010)।

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