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16 सितंबर 2010

यूपीःप्राथमिक विद्यालयों में इमला अनिवार्य

आधुनिक शिक्षा पद्धति की भेंट चढ़ चुकी इमला परंपरा में फिर से जान फूंकी जा रही है। प्रदेश के जिन प्राथमिक विद्यालयों में यह परंपरा समाप्त होने के कगार पर थी, वहां फिर से इमला गूंजता सुनाई देगा। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से प्राथमिक विद्यालयों में इमला तथा मौखिक परीक्षा एवं अभ्यास कराने की प्रक्रिया को प्रारंभ कर दिया गया है। इस सम्बन्ध में परिषद ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। परिषद के सचिव आईपी शर्मा ने बताया कि अगस्त माह में हुई बैठक में आंग्ल भाषा शिक्षा संस्थान के प्राचार्य स्कंद शुक्ल के सुझाव को मानते हुए यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि हालांकि प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापक इमला की परंपरा पहले से थी, लेकिन अब इसे अनिवार्य करते हुए निर्देश दिये गये हैं। वहीं स्कंद शुक्ल ने बताया कि इमला और मौखिक परीक्षा से बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ती है और शुद्ध लेखन व उच्चारण क्षमता विकास होता है, हालांकि इमला सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन बच्चों पर इसका काफी प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा इमला बोलने के बाद अध्यापक प्रत्येक बच्चे का सतत मूल्यांकन भी कर सकता है। उन्होंने बताया कि बड़े-बुजुर्ग आज भी इमला को प्रभावी मानते हैं और इसका अनुसरण करने की सलाह देते हैं(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,16.9.2010)।

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