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29 सितंबर 2010

गांधियन स्टडीज में करिअर

गांधियन स्टडी का मतलब सिर्फ गांधी के सिद्धांतों की जानकारी भर नहीं है। दरअसल आज के पूंजीवादी माहौल में यह विकास का नया मॉडल भी पेश करता है। इससे संबंधित कोर्स भले ही कॉरपोरेट जगत की बड़ी नौकरियां न दिला पाते हों, लेकिन समाज को नेतृत्व प्रदान करने और आत्मनिर्भर बनने का हुनर जरूर सिखाते हैं। लघु और कुटीर उद्योग में संभावनाएं तलाशने वालों के लिए यह बेहद फायदेमंद हैं।

महात्मा गांधी का जीवन और चिंतन युवाओं के लिए अब एक संपूर्ण विषय बन गया है। एक ऐसा विषय, जो देश-दुनिया के विकास और मानव सेवा का नया पाठ पढ़ाता है। समाज में शांति और खुशहाली का संदेश देता है। पूंजीवादी व्यवस्था के बरअक्स विकास का नया मॉडल पेश करता है। इस तरह के चिंतन से लैस और जीवन की राह तय करने में मददगार यह विषय गांधियन स्टडीज कोर्स के रूप में विकसित हो गया है। स्कूल, कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालयों में इसे लेकर नए विभाग बन गए हैं और उनमें तरह-तरह के कोर्स चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो ये कोर्स कॉरपोरेट जगत में प्रबंधक या निदेशक या किसी सरकारी दफ्तर में बाबू भले ही नहीं बना सके, लेकिन समाज को नेतृत्व प्रदान करने और आत्मनिर्भर बनने का हुनर जरूर सिखाते हैं। ये आज के मुन्नाभाई के अंदाज में गांधीगिरी का नया पाठ पढ़ाते हैं।

कोर्स क्या हैं?

गांधी अध्ययन या गांधीवादी थ्योरी को समझने के लिए आज शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर एमए, एमफिल और पीएचडी तक के कोर्स हैं। स्कूलों में बुनियादी शिक्षा और नैतिक ज्ञान का जीवन दर्शन देने के लिए गांधीजी पर अलग से चैप्टर जगह-जगह पढ़ाए जा रहे हैं। कॉलेजों में भी इनके सिद्धांत स्नातक के कोर्स में एक पाठ और पेपर के रूप में शामिल हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की बात करें तो यहां पांच साल पहले बीए ऑनर्स के छात्रों के लिए रीडिंग गांधी का एक पेपर बनाया गया, जिसे इंटरडिसिप्लनरी पेपर के रूप में छात्र पढ़ते हैं। देश में राज्य स्तर के विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्र उनके सामाजिक, आर्थिक व राजनीति सिद्धांतों से रूबरू होते हैं। सर्टिफिकेट कोर्स में गांधियन थ्योरी का बेसिक ज्ञान दिया जाता है। डिप्लोमा कोर्स के साथ भी कुछ ऐसा ही है। गांधी अध्ययन में एमए करने पर छात्रों को उनकी थ्योरी के बारे में विस्तार से बताया जाता है। इसमें आठ पेपरों के तहत छात्रों को स्वावलंबन, ग्राम स्वराज व ग्रामोत्थान, अहिंसा, सत्याग्रह, पंचायती राज, विकेन्द्रीकरण, लघु व कुटीर उद्योग का विकास, पर्यावरण के अनुकूल विकास का मॉडल जैसी चीजों के बारे में बताया जाता है। इससे जुड़े कोर्स में विकास के जो गांधीवादी सिद्धांत या मॉडल हैं, उससे छात्रों को रूबरू कराया जाता है। गांधीवादी अर्थशास्त्र, राजनीतिक व सामाजिक सिद्धांतों का ज्ञान दिया जाता है। कोर्स में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने पर भी जोर रहता है। यही नहीं, गांधीवादी थ्योरी पर आगे चल कर काम करने वाले लोगों को भी बतौर उदाहरण पेश किया जाता है, चाहे वह विनोबा भावे हों या जयप्रकाश नारायण। एमफिल और पीएचडी में छात्रों को गांधीवादी चिंतन के विविध पहलुओं में से किसी एक पर गहन अध्ययन करना होता है। उसकी आज के समय में प्रासंगिकता को देखना होता है।

कोर्स के रंग

गांधी अध्ययन में कई शिक्षण संस्थान सर्टिफिकेट कोर्स और डिप्लोमा कोर्स चलाते हैं। विश्वविद्यालयों के गांधी स्टडीज विभाग में इस पर अलग से एमए, एमफिल और पीएचडी का कोर्स चल रहा है। इसके अलावा कहीं-कहीं इसे एक पेपर के रूप में पढ़ाया जा रहा है।

करियर की राह

गांधी अध्ययन को व्यावसायिक कोर्स के रूप में भले ही नहीं गिना जाता, पर छात्रों को यह आत्मनिर्भर बनाने में जरूर मदद करता है। रोजगार का मकसद भी आत्मनिर्भर ही बनना है। इस लिहाज से यह कोर्स कम उपयोगी नहीं है। स्वरोजगार के तहत चाहे लघु व कुटीर उद्योग चलाना हो या कृषि से जुड़े कार्य, यह आत्मनिर्भरता का एक नया पाठ पढ़ाता है। एमए और पीएचडी करने वाले छात्रों को कॉलेज व विश्वविद्यालयों में इस विषय के अध्ययन-अध्यापन में अवसर मिलते हैं। इसके अलावा इस विषय के जानकारों के लिए सबसे बड़ा अवसर स्वयंसेवी संगठनों में काम करने का है। देश में तरह-तरह के एनजीओ इस कोर्स के छात्रों को अपने यहां काम के लिए अवसर मुहैया कराते हैं। कई मायने में यह कोर्स समाज को नेतृत्व प्रदान करने का अवसर दिलाता है।

कहां होती है पढ़ाई

पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
अन्नामलाई यूनिवर्सिटी
गुजरात विद्यापीठ
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी
महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टायम, केरल
तिलक गांधी विश्वविद्यालय, भागलपुर
इंस्टीटय़ूट ऑफ गांधियन स्टडीज, वर्धा
इंस्टीटय़ूट ऑफ गांधियन स्टडीज, वाराणसी
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा

विशेषज्ञों की राय

दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन के प्रोफेसर सीबी सिंह कहते हैं, गांधी का पूरा चिंतन सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और नौतिक मूल्यों से जुड़ा है, इसलिए यह एक कोर्स के रूप में विकसित हुआ है। विश्वविद्यालयों में अध्ययन-अध्यापन के लिए नए विभाग बनाए गये हैं। गांधी शांति प्रतिष्ठान में गांधीवादी चिंतक सुरेन्द्रजी कहते हैं, कोर्स के जरिए विकास के गांधीवादी मॉडल से छात्रों को अवगत कराया जाता है। गांधीवादी अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और राजनीतिक चिंतन को समझने का माध्यम है यह कोर्स। शहीद भगत सिंह कॉलेज में राजनीतिशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर सतीश कुमार सिंह के मुताबिक गांधीवाद का पेपर आज के समय में छात्रों को गांधीवादी सिद्धांत की प्रासंगिकता से जोड़ता है। इसमें उनके सिद्धांत, सत्याग्रह, स्वराज, अहिंसा और समाज के विकास के गांधियन मॉडल के बारे में बताया जाता है(आनंद कुमार,हिंदुस्तान,दिल्ली,29.9.2010)।

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