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23 सितंबर 2010

भोपाल में हिंदी विश्वविद्यालय को लेकर राजनीति तेज

मध्यप्रदेश में तेजी से एजुकेशन हब के रूप में विकसित होते भोपाल में हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना का काम तेज हो गया है। विवि का स्वरूप तय करने के लिए तेरह सदस्यीय परामर्शदात्री समिति गठित की गई है,जिसकी पहली बैठक 6 अक्टूबर को राजधानी में होगी। विश्वविद्यालय के स्थान को लेकर सत्तापक्ष में राजनीति शुरू हो गई है।

विवि के लिए भोपाल ही उपयुक्त स्थान माना जा रहा है, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और विदिशा के प्रभावशाली नेताओं की मंशा इसे उनके यहां ले जाने की है, जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कुछ समर्थक इसे सीहोर में चाहते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे पर अमल करते हुए पिछले सप्ताह राज्य मंत्रिमंडल ने ताबड़तोड़ हिंदी विवि की स्थापना का निर्णय लिया था। संभवत: इस विवि का नाम पं दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विवि रखा जाएगा। इसमें पहले चरण में वे पाठच्यक्रम शुरू किए जाएंगे जिनकी पुस्तकें हिंदी में उपलब्ध हैं।

समिति में संघ की विचारधारा से जुड़े अधिकांश शिक्षाविदों को शामिल किया गया हैं। समिति के अध्यक्ष उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा हैं। शर्मा प्रदेश में संघ के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। चाहे संस्कृति हो या फिर शिक्षा। समिति में सांसद तरुण विजय, काशी विवि वाराणसी के कुलपति डॉ.डीपी सिंह,गांधी विद्या संस्थान वाराणसी की समाज शास्त्र विषय की प्रोफेसर डा कुसुमलता केडिया वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक,महर्षि दयानंद विवि अजमेर में अर्थशास्त्र विषय के प्रोफेसर मोहनलाल छीपा,काशी हिंदू विवि वाराणसी के भौतिकी शास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डीके राय,इसी विवि के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. रामचंद्र सिंह, एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक डॉ.जगमोहन सिंह राजपूत,देवी अहिल्या विवि के पूर्व कुलपति उमराव चौधरी,राजस्थान विवि जयपुर के राजनीति शास्त्र विषय के विभागाध्यक्ष प्रो. मधुकर श्याम चतुर्वेदी, आगरा विवि के पूर्व कुलपति गिरीश सक्सेना, रानी दुर्गावती विवि के जबलपुर के वनस्पति विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. केसी शर्मा इसी विवि के भौतिकी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो सुरेश्वर शर्मा शामिल किए गए हैं।

16 हजार विद्यार्थी पढ़ेंगे

प्रारंभिक अवधारणा के अनुसार विवि में कृषि, इंजीनियरिंग, मेडिकल, धर्म विज्ञान और प्रदर्शनकारी कला समेत सोलह संकाय होंगे। कुल 16 हजार छात्र-छात्राओं के अध्ययन की व्यवस्था होगी। करीब दस हजार विद्यार्थी स्नातक स्तर पर और पांच हजार स्नातकोत्तर स्तर पर रहेंगे।

शेष एक हजार छात्र-छात्राएं शोध कर सकेंगे। दो हजार छात्रों और एक हजार छात्राओं के लिए होस्टल सुविधा जुटाई जाएगी। विद्यार्थियों के लिए की स्थापना के लिए लगभग 500 करोड़ रुपए की जरुरत पड़ेगी(दैनिक भास्कर,भोपाल,23.9.2010)।

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