पूंजी बाजार में अपना वर्चस्व रखने, विदेशी बैंकों के मुकाबले बाजार में तथा विदेश में अलग पहचान बनाए रखने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) समूह ने सहयोगी पांच बैंकों के अपने में विलय की कवायद शुरू कर दी है। इस संबंध में एसबीआई चेयरमैन ओ.पी.भट्ट ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर मर्जर की इच्छा जताई है। पत्र में कहा गया है कि स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (एसबीपी), स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (एसबीएच), स्टेट बैंक त्रावणकोर (एसबीटी), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (एसबीएम) का एसबीआई में विलय कराया जाए।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहयोगी पांचों बैंकों का मर्जर इसलिए करने जा रहा है ताकि एसबीआई की तरलता इतनी हो जाए कि ग्लोबललाइजेशन के दौर में अन्य कोई बैंक भारत में एसबीआई को चुनौती नहीं दे सके। हाल ही में भारत सरकार ने रुपए के अंतराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाए रखने के लिए रुपए का नया लोगो जारी किया था। इसी की तर्ज पर एसबीआई बैंक ने अन्तरराष्ट्रीय पहचान रखने के लिए नई शुरुआत कर दी है। इसी वजह से 25 अगस्त को एसबीआई ने सहयोगी स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का एसबीआई में मर्जर किया था।
सात में से पांच लक्ष्य शेष
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष तक एसबीआई के सात सहयोगी बैंक थे। बैंक ऑफ सौराष्ट्र का पिछले वर्ष और बैंक ऑफ इंदौर का 25 अगस्त को मर्जर हुआ है। अब बाकि पांच बैंकों का भी मर्जर जल्द ही किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि एसबीआई प्रमुख ओपी भट्ट का मार्च 2011 में रिटायरमेंट है। रिटायरमेंट से पहले वे सभी सहयोगी बैंकों का मर्जर एसबीआई में कराने के इच्छुक है।
हमने वित्त मंत्रालय को मर्जर के लिए पत्र लिखा है, मर्जर से ग्राहक और बैंककर्मी सभी को फायदा होगा। - ओपी भट्ट, चेयरमैन एसबीआई, मुबंई
एसबीबीजे सहित पांचों बैंक अच्छे मुनाफे में है। ऐसे में मर्जर क्यों किया जाए। मर्जर से एसबीआई को कोई बड़ा लाभ नहीं होगा लेकिन इन बैंकों से लोग नाता तोड़ लेंगे। - महेश मिश्रा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉयज यूनियन
राजस्थान में 737 शाखाएं, 15 लाख खाताधारकों पर पड़ेगा असर
बैंकिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस मर्जर से प्रदेश की 737 शाखाओं और 15 लाख खाताधारकों पर असर पड़ेगा। सर्वाधिक असर एसबीबीजे ग्राहकों पर पड़ेगा। प्रदेश में एसबीबीजे की 708 शाखाएं है(दैनिक भास्कर,जयपुर,17.9.2010)।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहयोगी पांचों बैंकों का मर्जर इसलिए करने जा रहा है ताकि एसबीआई की तरलता इतनी हो जाए कि ग्लोबललाइजेशन के दौर में अन्य कोई बैंक भारत में एसबीआई को चुनौती नहीं दे सके। हाल ही में भारत सरकार ने रुपए के अंतराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाए रखने के लिए रुपए का नया लोगो जारी किया था। इसी की तर्ज पर एसबीआई बैंक ने अन्तरराष्ट्रीय पहचान रखने के लिए नई शुरुआत कर दी है। इसी वजह से 25 अगस्त को एसबीआई ने सहयोगी स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का एसबीआई में मर्जर किया था।
सात में से पांच लक्ष्य शेष
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष तक एसबीआई के सात सहयोगी बैंक थे। बैंक ऑफ सौराष्ट्र का पिछले वर्ष और बैंक ऑफ इंदौर का 25 अगस्त को मर्जर हुआ है। अब बाकि पांच बैंकों का भी मर्जर जल्द ही किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि एसबीआई प्रमुख ओपी भट्ट का मार्च 2011 में रिटायरमेंट है। रिटायरमेंट से पहले वे सभी सहयोगी बैंकों का मर्जर एसबीआई में कराने के इच्छुक है।
हमने वित्त मंत्रालय को मर्जर के लिए पत्र लिखा है, मर्जर से ग्राहक और बैंककर्मी सभी को फायदा होगा। - ओपी भट्ट, चेयरमैन एसबीआई, मुबंई
एसबीबीजे सहित पांचों बैंक अच्छे मुनाफे में है। ऐसे में मर्जर क्यों किया जाए। मर्जर से एसबीआई को कोई बड़ा लाभ नहीं होगा लेकिन इन बैंकों से लोग नाता तोड़ लेंगे। - महेश मिश्रा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉयज यूनियन
राजस्थान में 737 शाखाएं, 15 लाख खाताधारकों पर पड़ेगा असर
बैंकिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस मर्जर से प्रदेश की 737 शाखाओं और 15 लाख खाताधारकों पर असर पड़ेगा। सर्वाधिक असर एसबीबीजे ग्राहकों पर पड़ेगा। प्रदेश में एसबीबीजे की 708 शाखाएं है(दैनिक भास्कर,जयपुर,17.9.2010)।
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