इसे शिक्षा अधिकारी की मनमानी कहें या क्षेत्रीय उपशिक्षा निदेशक कार्यालय का कमाल! पटना प्रमंडल में प्रोन्नति पाये शिक्षकों की सूची सार्वजनिक नहीं की गई और उनका पदस्थापन हो गया। इस तरह नियम-परिनियम को ताक पर रखते हुए क्षेत्रीय उपशिक्षा निदेशक मेदो दास ने प्रोन्नति पाये शिक्षकों का पदस्थापन कर दिया। जबकि, नियमानुसार आपत्तियां लेने को सूची सार्वजनिक करने का प्रावधान है। बहरहाल प्रभावित शिक्षकों में आक्रोश है। शनिवार को क्षेत्रीय उपशिक्षा निदेशक कार्यालय में आरडीडीई मेदो दास से भेंट हुई तो प्रोन्नति पाये शिक्षकों की सूची सार्वजनिक करने के बारे में जानकारी मांगी। पहले तो उन्होंने स्वीकार किया- हां, कुछ शिक्षकों को प्रोन्नति दी गई है और पदस्थापन भी हो चुका है। इसपर संबंधित शिक्षकों की संख्या और सूची की जानकारी मांगने पर वे तैश में आ गए। बोले- सूची नहीं दे सकता, मेरा यही काम है? विभागीय नियमों का हवाला देने और अन्य कार्यो के बारे में जानकारी ली तो वे बोले- मेरे पास कोई ज्यादा काम नहीं है। केवल शिक्षकों की प्रोन्नति और एकेडमिक मामले को देखता हूं। दरअसल आरडीडीई मेदो दास ने जबसे कुर्सी संभाली है, माध्यमिक शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। उनका कार्यालय वन मैन इंडस्ट्री के रूप में संचालित है। आलम यह है कि दफ्तर से कोई सूचना मांगने पर प्रधान लिपिक से लेकर अन्य कर्मचारी तक मुंह खोलने से डरते हैं। जरूरतमंद शिक्षकों को तो बेवजह परेशान होना पड़ता है। काम के सिलसिले में आए शिक्षक रमेश प्रसाद सिंह ने दफ्तर के बाहर बताया कि महीनों से प्रोन्नति के लिए दौड़ रहा हूं। इसके लिए तमाम दस्तावेज जमा हो चुका है, किंतु कोई सुनता ही नहीं(दैनिक जागरण,पटना,6.9.2010)।
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