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13 सितंबर 2010

ड्रॉपऑउट छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स की तैयारी

.घरेलू परेशानी या साधनों के अभाव के चलते आज भी देश में काफी बच्चों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ जाती है। ऐसे बच्चे अगर बाद में फिर से पढ़ने की हिम्मत भी जुटाते हैं तो उन्हें उनकी बढ़ी उम्र के मुताबिक कक्षा में दाखिला नहीं मिल पाता है और वे पिछड़ जाते हैं। ऐसे ही छात्रों को मुख्यधारा में लाने के लिए राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की मदद से ब्रिज कोर्स तैयार किया जा रहा है।

इस योजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रेन के लिए तैयार हो रहे विशेष पाठ्यक्रमों को ब्रिज कोर्स के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। देश भर में ऐसे बच्चों की कमी नहीं है जिन्हें किसी न किसी परेशानी के चलते स्कूली पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती है।

ऐसे में जब वे फिर से अपनी पढ़ाई शुरू करना चाहते हैं तो उन्हें दाखिलों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं परिस्थितियों से निपटने के लिए एनसीईआरटी ऐसे ब्रिज कोर्स तैयार करने की दिशा में जुटी है जो कि छूटी कक्षा व दाखिला लेने वाली कक्षा के बीच एक ब्रिज का कार्य करेगा।

इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से ड्रापऑउट छात्र वह सब पढ़ पाएंगे जिससे चलते उन्हें अगली कक्षा में दाखिला लेने में परेशानी न हो। एनसीईआरटी की माने तो यह पाठ्यक्रम बच्चों की आयु के मुताबिक तैयार किए जाएंगे।

इनके तहत विभिन्न विषयों की थीम पर मॉड्यूल्स तैयार किए जाएंगे और इनके जरिए माध्यमिक स्तर के छात्रों को कक्षाओं में लेटरल एंट्री प्राप्त हो होगी। एनसीईआरटी का मानना है कि इस तरह के पाठ्यक्रमों के माध्यम से निश्चित रुप से पढ़ाई करने के लिए इच्छुक छात्रों को फायदा होगा(दैनिक भास्कर,दिल्ली,13.9.2010)।

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