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13 सितंबर 2010

दसवीं बोर्ड खत्म,पर चिंता बरकरार

दसवीं बोर्ड भले ही सत्र 2010 में खत्म हो गया हो, लेकिन इसको लेकर रहने वाली चिंता का निदान अभी नहीं हुआ है। इसका एक कारण केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का वह फरमान है जिसके तहत दसवीं की पढ़ाई कर रहे बच्चों से बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली वैकल्पिक परीक्षा में बैठने व न बैठने की जानकारी मांगी गई है।

नौंवी के बाद दसवीं में पहले साल लागू हुई समग्र सतत मूल्यांकन प्रणाली (सीसीई) के तहत अंजाम दी जा रही इस कवायद का एकमात्र उद्देश्य उन छात्रों की पहचान करना है जो 10वीं के बाद सीबीएसई बोर्ड को छोड़ना चाहते हैं।

सीबीएसई की ओर से छात्रों के घर स्कूलों से पहुंच रहे अंटरटेकिंग सम्बंधी आदेश के चलते छात्रों के साथ-साथ अभिभावक भी परेशान हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिरकार यह अंडटेकिंग किस लिए देना है। दरअसल, स्कूलों को बोर्ड की ओर से निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों से एक अंडरटेकिंग लें जिसमें यह जानकारी दी जाए कि कौन सा बच्च बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली वैकल्पिक परीक्षा देना चाहता है और कौन-सा बच्च नहीं।

चूंकि सीबीएसई बोर्ड के तहत दसवीं में पढ़ रहे बच्चों की वर्ष 2010-11 में बोर्ड की परीक्षा नहीं होगी, इसलिए उन छात्रों के लिए बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली दसवीं की वैक्लिपक परीक्षा होगी, जो इसके बाद बोर्ड छोड़कर अन्य किसी बोर्ड व कोर्स के इच्छुक हैं।

साफ है कि दसवीं में पढ़ रहे बच्चों को समेटिव मूल्यांकन के रुप में स्कूल के स्तर पर होने वाली परीक्षा तो देनी ही है और शपथ पत्र के माध्यम से स्कूलों को बताना है कि वह बोर्ड की समेटिव मूल्यांकन-२ की परीक्षा भी देना चाहते हैं या नहीं। डीएवी स्कूल के प्रिंसिपल रमाकांत ने बताया कि बच्चों से ऐसे शपथ पत्र इसलिए लिए जा रहे हैं ताकि बोर्ड तक परीक्षा देने वाले बच्चों का सही ब्यौरा पहु्चाया जा सके।

इसमें बच्चों का कोई नुकसान नहीं है, बस उन्हें तो यह ही लिखकर देना है कि वह कौन सी परीक्षा में बैठने के इच्छुक हैं। उल्लेखनीय है कि सीबीएसई की और से आयोजित होने वाली एसए-2 की परीक्षा उन्हीं बच्चों को देनी होगी जो दसवीं के बाद सीबीएसई बोर्ड से पढ़ाई नहीं करना चाहते हैं या सीबीएसई बोर्ड छोड़ कर किसी दूसरे बोर्ड में शिफ्ट होना चाहते हैं(दैनिक भास्कर,दिल्ली,13.9.2010)।

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