छठीं से आठवीं तक ग्रेडिंग के मामले में टाल-मटोल कर रहे देशभर के स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए सीबीएसई ने नए नियम बनाए हैं। 2006 में लागू इस व्यवस्था को अमल में लाने के लिए अब सीसीई के आधार पर नया मैन्युअल जारी कर दिया है, जिसके बाद स्कूलों के लिए 9वीं-10वीं के साथ-साथ छठीं से आठवीं तक की कक्षाओं में भी ग्रेडिंग को लागू करना अनिवार्य हो गया है।
बोर्ड की ओर से जारी नए मैन्युअल में पहले के सात प्वाइंट स्केल की सिफारिश के स्थान पर अब शैक्षिक मूल्यांकन के लिए नौ प्वाइंट व सह-शैक्षिक के लिए पांच प्वाइंट तैयार किया गया है। ग्रेडिंग सिस्टम को लागू करने में जुटे बोर्ड की सख्ती का ही नतीजा है कि शिक्षकों के लिए विस्तृत गाइडलाइन से भरपूर 161 पृष्ठ का मैन्युअल तैयार किया गया है, जिसके आधार पर ही उन्हें मूल्यांकन करना होगा। नए मैन्युअल में मूल्यांकन प्रक्रिया की विस्तार से चर्चा की गई है। जिससे शिक्षक यह मूल्यांकन प्रक्रिया ना समझ आने की शिकायत न कर सकें।
नए मैन्युअल के तहत नौंवी-दसवीं की सीसीई व्यवस्था की तरह ही छठीं से आठवीं में भी वर्ष को दो सत्रों में ही विभाजित किया है, लेकिन मूल्यांकन का पैमाना 9वीं व 10वीं से अलग रखा गया है। छठी से आठवीं तक के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया में दो सत्रों को 50-50 फीसदी में बांटा गया है।
जबकि 9वीं व 10वीं में 60-40 फीसदी का मूल्यांकन होता है। शिक्षकों को बताया गया है बोर्ड ने पहले सत्र में उन्हें फॉमर्टिव एसेस्मेंट-1 को 10 फीसदी, एफए-2 को 10 फीसदी, व समेटिव एसेस्मेंट को 30 फीसदी में बांटना है।
इसी तरह से दूसरे सत्र में फॉर्मेटिव एसेस्मेंट-3 में 10 फीसदी, फॉर्मेटिव एसेस्मेंट-4 में 10 फीसदी व समेटिव एसेस्मेंट में 30 फीसदी मूल्यांकन करना ही होगा। मैन्युअल में सीसीई के स्कूल बेस्ड एसेस्मेंट के कई पैमानों को बताया गया है। बोर्ड का मैन्युअल तैयार करने के पीछे मूल उद्देश्य ही यह है कि अन्य कक्षाओं में भी शिक्षक सीसीई की भांति मूल्यांकन प्रक्रिया को अंजाम दें और विभिन्न कक्षाओं की पढ़ाई में एकरूपता बनी रहे(दैनिक भास्कर,दिल्ली,12.9.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।