बिना पेपर दिए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के असली सर्टिफिकेट बेचने के मामले की जांच अभी जारी है और बोर्ड प्रशासन ने जेबीटी प्रवेश परीक्षा पास करवाने के मामले में ठगी की शिकायत दर्ज करवाई है। बोर्ड की शिकायत पर पुलिस ने बोर्ड के ही कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
कर्मचारी पर जेबीटी प्रवेश परीक्षा में परीक्षार्थी को पास करवाने की एवज में 20 हजार रुपए लेने का आरोप है। यह मामला सकोह के संजीव की शिकायत के बाद दर्ज हुआ है। बोर्ड ने छात्र की शिकायत पर पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया है।
बोर्ड सचिव की ओर से धर्मशाला पुलिस को भेजे शिकायत पत्र में बोर्ड कर्मचारी पर जेबीटी प्रवेश परीक्षा में पास करवाने की एवज में 20 हजार रुपए मांगने का आरोप है। सकोह के संजीव कुमार ने बोर्ड प्रशासन से शिकायत की थी बोर्ड कर्मचारी की मांग पर उसने 20 हजार रुपए मंडी के संधोल पीएनबी की शाखा में जमा करवाए थे। इसके बावजूद उसे प्रवेश परीक्षा में पास नहीं करवाया गया। इसके चलते संजीव कुमार ने बोर्ड प्रशासन से शिकायत करके बोर्ड कर्मचारी पर ठगी का आरोप लगाया है।
वहीं, सर्टिफिकेट फर्जीवाड़े में भी बोर्ड की विभिन्न ब्रांचों के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। मंगलवार को धर्मशाला थाना प्रभारी प्रताप ठाकुर ने धर्मशाला स्थित बोर्ड मुख्यालय जाकर विभिन्न ब्रांचों का रिकॉर्ड जांचकर कर्मियों से पूछताछ की।
पुलिस जांच में सामने आया कि दसवीं के 63 परीक्षार्थियों जिन्हें सर्टिफिकेट बेचे गए, उनमें से 37 परीक्षार्थियों के परीक्षा फॉर्म बोर्ड की निर्धारित तारीख के बाद विशेष अनुमति पर बोर्ड कार्यालय में जमा करवाए गए थे। इनमें से अधिकतर फॉर्म ऐसे थे, जिनमें कुछ में परीक्षार्थी के हस्ताक्षर नहीं थे जबकि कुछ फॉर्म सही पाए गए।
आरोपी से मशीन बरामद
सर्टिफिकेट फर्जीवाड़े में बुधवार को पुलिस ने मामले के मास्टर माइंड अश्वनी डोगरा और मुख्य आरोपी सुरेश चौधरी की शिनाख्त पर कांगड़ा एयरपोर्ट के पास स्थित दिव्य ज्योति अकेडमी में आंसरशीट्स पर सीकेट्र नंबर अंकित करने वाली मशीन बरामद की। पुलिस आरोपियों की शिनाख्त पर अन्य ठिकानों पर दबिश देने में जुटी है।
पुलिस ने धर्मशाला स्थित मुख्य डाकघर के रिकॉर्ड की भी जांच की ताकि इस नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके। बुधवार को पुलिस ने बिना पेपर दिए बोर्ड के असली सर्टिफिकेट खरीदने वाले सभी परीक्षार्थियों की शिनाख्त कर ली है।
पुलिस ने आरोपियों से बरामद स्कैनर पर आरोपियों की ओर से बताए गए तरीके से जांच के लिए जो आंसरशीट्स बनाई हैं वह बोर्ड की असली आंसरशीट्स से मेल खाती हैं। मात्र कागज की क्वालिटी में ही हलका सा अंतर पाया गया है।
इससे यह माना जा रहा है कि आरोपी आंसरशीट्स स्कैन करके ही बनाते थे और बाद में उस पर सीकेट्र नंबर अंकित कर पेपर हल करवाते थे। अश्वनी डोगरा को वर्ष 2007 में शिक्षा विभाग ने सस्पेंड कर उसके वेतन और अन्य भत्तों पर रोक लगा दी थी। मई 2010 में शिक्षा विभाग ने अश्वनी डोगरा के मामले पर निर्णय लेते हुए उसकी आधी तनख्वाह और अन्य भत्तों की अदायगी शुरू की थी।
मामले में आरोपी अध्यापक को तीन वर्षो तक शिक्षा विभाग ने टर्मिनेट क्यों नहीं किया, इस पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुरेश चौधरी को कोर्ट ने 17 सितंबर तक रिमांड पर भेज दिया है(दैनिक भास्कर,धर्मशाला,17.9.2010)।
कर्मचारी पर जेबीटी प्रवेश परीक्षा में परीक्षार्थी को पास करवाने की एवज में 20 हजार रुपए लेने का आरोप है। यह मामला सकोह के संजीव की शिकायत के बाद दर्ज हुआ है। बोर्ड ने छात्र की शिकायत पर पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया है।
बोर्ड सचिव की ओर से धर्मशाला पुलिस को भेजे शिकायत पत्र में बोर्ड कर्मचारी पर जेबीटी प्रवेश परीक्षा में पास करवाने की एवज में 20 हजार रुपए मांगने का आरोप है। सकोह के संजीव कुमार ने बोर्ड प्रशासन से शिकायत की थी बोर्ड कर्मचारी की मांग पर उसने 20 हजार रुपए मंडी के संधोल पीएनबी की शाखा में जमा करवाए थे। इसके बावजूद उसे प्रवेश परीक्षा में पास नहीं करवाया गया। इसके चलते संजीव कुमार ने बोर्ड प्रशासन से शिकायत करके बोर्ड कर्मचारी पर ठगी का आरोप लगाया है।
वहीं, सर्टिफिकेट फर्जीवाड़े में भी बोर्ड की विभिन्न ब्रांचों के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। मंगलवार को धर्मशाला थाना प्रभारी प्रताप ठाकुर ने धर्मशाला स्थित बोर्ड मुख्यालय जाकर विभिन्न ब्रांचों का रिकॉर्ड जांचकर कर्मियों से पूछताछ की।
पुलिस जांच में सामने आया कि दसवीं के 63 परीक्षार्थियों जिन्हें सर्टिफिकेट बेचे गए, उनमें से 37 परीक्षार्थियों के परीक्षा फॉर्म बोर्ड की निर्धारित तारीख के बाद विशेष अनुमति पर बोर्ड कार्यालय में जमा करवाए गए थे। इनमें से अधिकतर फॉर्म ऐसे थे, जिनमें कुछ में परीक्षार्थी के हस्ताक्षर नहीं थे जबकि कुछ फॉर्म सही पाए गए।
आरोपी से मशीन बरामद
सर्टिफिकेट फर्जीवाड़े में बुधवार को पुलिस ने मामले के मास्टर माइंड अश्वनी डोगरा और मुख्य आरोपी सुरेश चौधरी की शिनाख्त पर कांगड़ा एयरपोर्ट के पास स्थित दिव्य ज्योति अकेडमी में आंसरशीट्स पर सीकेट्र नंबर अंकित करने वाली मशीन बरामद की। पुलिस आरोपियों की शिनाख्त पर अन्य ठिकानों पर दबिश देने में जुटी है।
पुलिस ने धर्मशाला स्थित मुख्य डाकघर के रिकॉर्ड की भी जांच की ताकि इस नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके। बुधवार को पुलिस ने बिना पेपर दिए बोर्ड के असली सर्टिफिकेट खरीदने वाले सभी परीक्षार्थियों की शिनाख्त कर ली है।
पुलिस ने आरोपियों से बरामद स्कैनर पर आरोपियों की ओर से बताए गए तरीके से जांच के लिए जो आंसरशीट्स बनाई हैं वह बोर्ड की असली आंसरशीट्स से मेल खाती हैं। मात्र कागज की क्वालिटी में ही हलका सा अंतर पाया गया है।
इससे यह माना जा रहा है कि आरोपी आंसरशीट्स स्कैन करके ही बनाते थे और बाद में उस पर सीकेट्र नंबर अंकित कर पेपर हल करवाते थे। अश्वनी डोगरा को वर्ष 2007 में शिक्षा विभाग ने सस्पेंड कर उसके वेतन और अन्य भत्तों पर रोक लगा दी थी। मई 2010 में शिक्षा विभाग ने अश्वनी डोगरा के मामले पर निर्णय लेते हुए उसकी आधी तनख्वाह और अन्य भत्तों की अदायगी शुरू की थी।
मामले में आरोपी अध्यापक को तीन वर्षो तक शिक्षा विभाग ने टर्मिनेट क्यों नहीं किया, इस पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुरेश चौधरी को कोर्ट ने 17 सितंबर तक रिमांड पर भेज दिया है(दैनिक भास्कर,धर्मशाला,17.9.2010)।
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