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02 सितंबर 2010

कश्मीरःपढ़ाई के लिए घाटी में सड़कों पर उतरे बच्चे

कश्मीर घाटी में बुधवार को सामान्य हालात के बीच बच्चे सड़क पर उतर आए। हालांकि इनके हाथ में पत्थर और लाठियां नहीं बल्कि बस्ते और किताबें थीं। नारेबाजी इन बच्चों ने भी की, लेकिन न आजादी मांगी, न स्वायत्तता, मांगा तो सिर्फ अपना भविष्य जो स्कूलों के बंद रहने से अंधेरे की तरफ बढ़ रहा है। हालांकि आजादी और जेहाद के नाम पर मासूम कश्मीरियों को गुमराह करने वालों को उनका यह प्रदर्शन रास नहीं आया। वादी के हालात के मद्देनजर दिल्ली पब्लिक स्कूल ने श्रीनगर स्थित अपने स्कूल में पढ़ रहे 150 बच्चों को हवाईजहाज के जरिये दिल्ली बुला लिया। वादी में जून से जारी हिंसक प्रदर्शनों का सबसे बुरा असर शिक्षा क्षेत्र पर हो रहा है। लगभग सभी स्कूल बंद पड़े हैं जो तभी खुलते हैं जब अलगाववादी बंद में कुछ पल के लिए राहत देते हैं। पढ़ाई चौपट होने से परेशान छात्रों ने बुधवार को हताश होकर लाल चौक का रुख किया। ये बच्चे बंद और हिंसक प्रदर्शनों की निंदा करते हुए कह रहे थे कि शिक्षा उनका मौलिक अधिकार है, जिसे छीना नहीं जाना चाहिए। इन बच्चों ने इस्लाम के आदर्शो का जिक्र करते हुए कहा कि जो स्कूल बंद करा रहे हैं वे किसी भी तरह से कश्मीरियों के खैरख्वाह नहीं हैं। कुछ लोगों ने छात्रों के साथ मौजूद नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता फारूक गांदरबली और उनके बेटे एजाज खान के साथ मारपीट भी की(दैनिक जागरण,श्रीनगर,2.9.2010)।

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