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07 सितंबर 2010

शहीदों के नाम बनेंगी विश्वविद्यालयों में पीठ

स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के डेढ़ सौ साल बाद सरकार ने शहीदों को थोड़ा और मान देने का मन बनाया है। सरकार ने तय किया है कि वह 12 शहीदों के नाम पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीठ (चेयर) स्थापित करेगी। उनमें स्वतंत्रता संग्राम पर अध्ययन और शोध को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार ने निर्णय लिया है कि जवाहर लाल नेहरू और दिल्ली विश्वविद्यालय समेत दूसरे छह विश्वविद्यालयों में शहीदों के नाम से पीठ स्थापित की जाएंगी। केंद्र उसके लिए 5 करोड़ रुपये का फंड देगा ताकि स्वतंत्रता संग्राम काल पर शोध किया जा सके। यह और बात है कि बिहार में आरा के वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय और मध्य प्रदेश में उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय को अपने नायकों की ही सुध नहीं। इन दोनों जगहों से केंद्र सरकार को अब तक कोई प्रस्ताव नहीं मिला है, लिहाजा इस मद में उन्हें कोई फंड जारी नहीं किया गया है। बाकियों को दो करोड़ रुपये का फंड जारी कर दिया गया है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में शहीद भगत सिंह के नाम से पीठ बनेगी तो दिल्ली विश्वविद्यालय में अरुणा आसफ अली और तात्या टोपे के नाम से। इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में तीन पीठ होंगी। देश के अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर, सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के सिपाही जे. शाह नवाज और शहीद करतार सिंह सराबा के नाम पर इग्नू में पीठ होगी। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सैफुद्दीन किचलू, ए.एम. ख्वाजा, एम.ए. अंसारी और रफी अहमद किदवई के नाम पर अध्ययन की सुविधा होगी। इन सबके बीच आरा और उज्जैन विश्वविद्यालय ने उत्साह नहीं दिखाया है। आरा में वीर कुंवर सिंह के ही नाम पर बने विश्वविद्यालय ने उन पर स्थापित होने वाली पीठ के लिए कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा है। यही हाल उज्जैन का भी है। वहां चंद्रशेखर आजाद के नाम पर पीठ स्थापित होनी है लेकिन वहां से भी प्रस्ताव सरकार के पास नहीं भेजा गया है। लिहाजा दोनों विश्वविद्यालयों को फंड जारी नहीं किए गए हैं(आशुतोष झा,दैनिक जागरण,दिल्ली,7.9.2010)।

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