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28 सितंबर 2010

ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों में ड्रेस कोड

ग्रेटर नोएडा में नॉलेज पार्क स्थित 2 दर्जन कॉलेजों ने ड्रेस कोड लागू कर दिए हैं। इस बाबत मैनेजमेंट ने कॉलेज गेट पर बाकायदा नोटिस लगा दिए हैं। सभी स्टूडेंट्स को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उन्हें ही क्लास अटेंड करने की इजाजत होगी जो डे्रस कोड को फॉलो करेंगे और आईकार्ड लगाकर आएंगे।

कॉलेजों में डे्रस कोड लागू होने पर कुछ स्टूडेंट्स ने नाराजगी भी जताई है। लेकिन इस नाराजगी का कॉलेज मैनेजमेंट पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। मैनेजमेंट का कहना है कि ड्रेस कोड लागू होने से स्टूडेंट्स में अनुशासन बना रहता है। इससे कॉलेज के स्टूडेंट्स की पहचान आसानी से हो जाती है। साथ ही स्टूडेंट्स फैशनेबल कपडे़ पहनकर आते हैं तो उनमें पढ़ाई के बजाय आपस में फैशन की होड़ लग जाती है।

जिन कॉलेजों में अभी तक ड्रेस कोड लागू नहीं था, उन कॉलेजों के मैनेजमेंट भी अपने संस्थान में डे्रस कोड लागू करने की तैयारी में जुटे हैं। मैनेजमेंट विचार कर रहे हैं कि किस कलर की ड्रेस स्टूडेंट्स को दी जाए। गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी समेत कई कॉलेजों में तो लड़कियों के जींस टॉप पहनने पर बैन लगा दिया गया है। कई कॉलेजों में तो लड़कियों के लिए सलवार-कमीज ही डे्रस कोड हैं। जबकि कई कॉलेजों में स्टूडेंट्स को डे्रस कोड में पेंट-शर्ट और टाई पहनने के निर्देश दिए गए हैं।

दूसरी तरफ, स्कूल से निकलकर कॉलेज आने वाले स्टूडेंट्स की तमन्ना होती है कि उन्हें अब ड्रेस कोड से छुटकारा मिले। वह कॉलेज में फैशनेबल कपड़े पहनने की सोचते हैं। लेकिन ड्रेस कोड की अनिवार्यता उनके सपनों को तोड़ रही है। एक स्टूडेंट शीतल वर्मा का कहना है कि फैशन की होड़ समाप्त करने के लिहाज से तो यह निर्णय सही है, लेकिन इस तरह के निर्णय उन्हें बोर भी कर देते हैं। अनुज का कहना है कि ड्रेस कोड के कारण उनकी हसरतें मन में दबी रह गई हैं(नवभारत टाइम्स,ग्रेटर नोएडा,28.9.2010)।

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