हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार के उन अफसरों के नाम व पते न्यायालय के समक्ष रखने के आदेश दिए हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामले दर्ज हुए हैं और अभी तक उनके खिलाफ ट्रायल नहीं चले हैं। उच्च न्यायालय ने ये आदेश राज्य की मुख्य सचिव द्वारा न्यायालय के समक्ष दायर शपथ पत्र का अवलोकन करने के पश्चात पारित किए। शपथ पत्र में केवल तीन अफसरों के नाम दिए गए हैं जिनके खिलाफ ट्रायल लंबित होने के बावजूद सेवा बहाली के आदेश पारित कर दिए हैं। शपथ पत्र के अनुसार एक अधिकारी बलदेव सिंह ठाकुर के खिलाफ उस समय मामला दर्ज हुआ जब किसी विभाग के अध्यक्ष थे। उन्हें 3 जनवरी 2009 से 9 अगस्त 2010 तक सेवाओं से निलंबित रखा गया था। पूर्व सहायक ड्रग कन्ट्रोलर शेर सिंह को 22 फरवरी 2008 से 16 अक्तूबर 2009 तक निलंबित रखा गया। इसके अलावा जमीत सिंह पूर्व नायब तहसीलदार व वर्तमान में भू अधिग्रहण अधिकारी कांगड़ा को 30 मार्च 2003 से 6 अगस्त 2009 तक सेवाओं से निलंबित रखा गया। उच्च न्यायालय को राज्य सरकार की ओर से यह विश्वास दिलाया गया कि राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए सरकार वचनबद्ध है और भ्रष्टाचार का स्तर शून्य पर लाने के लिए राज्य सरकार की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके शर्मा ने न्यायालय के समक्ष हुई पिछली बहस के दौरान यह स्वीकार किया था कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के अंतर्गत मामले लंबित होने के बावजूद ऐसे अफसरों की सेवाओं को बहाल करने के आदेश पारित करना जनहित की दृष्टि से उचित नहीं है। न्यायालय ने यह व्यवस्था पूर्व सहायक ड्रग कन्ट्रोलर द्वारा विभागीय कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान दी। प्रार्थी के अनुसार ट्रायल के साथ विभाग कार्यवाही को चलाए जाना कानूनन गलत है। इस मामले पर सुनवाई आगामी 8 सितंबर को होगी(दैनिक जागरण,शिमला,2.9.2010)।
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