अमेरिका के संरक्षणवादी कदम से भले ही भारतीय आईटी कंपनियां परेशान हों मगर उसका एक फैसला देश के आईटी पेशेवरों को राहत दे सकता है। अगर भारत-अमेरिका के बीच पूर्णता करार हो जाता है तो भारतीय पेशेवरों को अमेरिका में सामाजिक सुरक्षा कर नहीं देना पड़ेगा। भारतीय आईटी पेशेवर सालाना दो अरब डॉलर से ज्यादा का भुगतान इस टैक्स के रूप में करते हैं। हालांकि भारत ने अमेरिका के संरक्षणवादी कदमों पर गहरी नाराजगी जताई है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉन किर्क से मुलाकात में देश के इस रुख से अवगत करा दिया है। आईटी पेशेवरों के लिए वीजा शुल्क बढ़ाने और ओहियो राज्य द्वारा सरकारी ठेकों में आउटसोर्सिग पर रोक को भारत ने गलत सलाह पर उठाया गया कदम करार दिया है। आनंद शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि रॉन किर्क से मुलाकात के दौरान हमने अपनी चिंता मजबूती के साथ रखी है। अमेरिका ने भारत और आईटी कंपनियों के इस रुख को गंभीरता से लिया है। उम्मीद है कि अमेरिका हमारी चिंताओं पर जल्द और उचित कदम उठाएगा। शर्मा व्यापार नीति मंच (टीपीएफ) की बैठक में भाग लेने यहां आए हैं। शर्मा और किर्क की मुलाकात में पूर्णता करार पर भी विचार-विमर्श हुआ। इस करार के तहत छोटी अवधि के लिए अमेरिका जाने वाले पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा कर नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि इस करार को पूरा करने की जरूरत है। भारतीय आईटी पेशेवर हर साल दो अरब डॉलर का सामाजिक सुरक्षा कर अदा करते हैं। उन्होंने भारतीय कंपनी एयरटेल द्वारा अमेरिकी कंपनी आईबीएम को दिए गए 3.5 अरब डॉलर के आर्डर का उल्लेख करते हुए कहा कि क्या यह आउटसोर्सिग नहीं है। ये नौकरियां कहां पैदा होंगी। बोइंग को सबसे बड़ा ऑर्डर भारत की ओर से मिला है। इससे कितनी नौकरियां बचेंगी या कितनी नौकरियों का सृजन होगा। अमेरिका में कंपनियों और सरकारी संगठनों को विदेशों से काम करवाने के प्रति हतोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही विवादास्पद मुहिम के खिलाफ शर्मा ने अमेरिकी उद्योगों से अपील की कि वे अपनी संसद और सरकार में बैठे लोगों को इस प्रकार की नीति के उल्टे प्रभावों की जानकारी दें। ओहियो प्रांत की सरकार द्वारा आउटसोर्सिग पर लगाया गया प्रतिबंध गलत सलाह पर उठाया गया कदम है। शर्मा ने कहा कि उम्मीद है कि कोई अन्य राज्य इस तरह की गलत सलाह पर निर्णय नहीं लेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के प्रभाव से उबर रही है, संरक्षणवाद से जुड़ा कोई भी कदम इसकी गति को धीमा करेगा। अच्छा हो कि इस रवैये से बचा जाए। खासकर इसलिए कि अमेरिका दुनिया का नेतृत्व करता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। सीमा सुरक्षा कानून के तहत अमेरिका ने इस साल अगस्त में एच-1बी और एल-1 वीजा के शुल्क में अगले पांच साल के लिए 2,000 डॉलर की वृद्धि कर दी है। इसका भारतीय आईटी क्षेत्र पर असर पडे़गा क्योंकि भारतीय पेशेवर छोटी अवधि के अनुबंधों के लिए इन वीजा का इस्तेमाल करते हैं। वैश्विक व्यापार को खोलने की विश्व व्यापार संगठन की वार्ताओं की धीमी गति के बारे में शर्मा ने कहा कि भारत की चिंताओं से अमेरिका को अवगत करा दिया गया है। वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका अपनी घरेलू प्रतिबद्धताओं की वजह से दोहा दौर के लिए तैयार नहीं है। इसके इस साल पूरा होने की उम्मीद नहीं है। एक सवाल पर शर्मा ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच मजबूती से आगे बढ़ते रणनीतिक रिश्तों के बीच भारतीय कंपनियों को प्रतिबंधित कंपनियों या संगठनों की सूची में रखने का कोई औचित्य नहीं है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक क्षेत्र में बनी सहमति और करार के बाद निर्यात पर नियंत्रण और भारतीय कंपनियों को सूची से हटाने का मसला पहले भी उठाया जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द इस पर कार्रवाई होगी। शर्मा ने बताया कि बैठक के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार और निवेश संधि किए जाने के सुझाव पर भी विचार विमर्श हुआ(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,23.9.2010)।
बहुत अच्छी जानकारी दी आपने। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
जवाब देंहटाएंआभार, आंच पर विशेष प्रस्तुति, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पधारिए!
अलाउद्दीन के शासनकाल में सस्ता भारत-2, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें