झारखंड का कोल्हान विश्वविद्यालय देश का ऐसा पहला विवि होगा, जहां बिना गुरु (अधिष्ठाता और विभागाध्यक्ष) शोध कार्य होगा। विवि शोध परिषद ने यूजीसी द्वारा शोध के लिए जारी 123 पेज के दिशा निर्देशों को दरकिनार कर शोध के इच्छुक अभ्यर्थियों को साक्षात्कार का बुलावा भेजा है। अर्थात शोधार्थियों को समुचित प्रक्रिया पूरी किए बिना ही पीएचडी की उपाधि हासिल हो जाएगी। रोस्टर के पेंच में फंस कर 12 अगस्त 2009 में अस्तित्व में आए कोल्हान विवि के पीजी सेंटर में अब तक न तो किसी विभागाध्यक्ष की नियुक्ति हुई है, न ही किसी संकाय में अधिष्ठाता बनाए गये हैं। बावजूद इसके रिसर्च काउंसिल जैसी बड़ी संस्था का गठन कर शोध के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया 4 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा हो चुकी है। इसमें वैसे अभ्यर्थियों को आने का बुलावा भेजा गया है, जिन्होंने रांची विवि द्वारा आयोजित रिसर्च इंट्रेंस टेस्ट, नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट या स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट पास किया हो। चयनित अभ्यर्थियों को छह माह की एडवांस प्रीपेटरी ट्रेनिंग के बाद शोध के विषय आवंटित कर दिए जाएंगे, लेकिन एडवांस प्रीपेटरी ट्रेनिंग का न तो अब तक पाठ्यक्त्रम तैयार किया गया है, न ही यह तय है कि यह किसके द्वारा, किसके निर्देशन में होगा? साक्षात्कार में हिस्सा लेने वालों के लिए विवरणिका तक नहीं छपी है। यूजीसी की नई गाइड लाइन के अनुसार, 2010 में शोध के इच्छुक छात्र-छात्राओं को न केवल उस विवि से रेट की परीक्षा पास करनी होगी बल्कि छह माह के रिसर्च ट्रेनिंग के लिए आवेदन करना होगा। परीक्षा में सफल होने पर ही शोध विषय आवंटित किया जाएगा। यूजीसी ने वेबसाइट पर इसके लिए पाठ्यक्त्रम भी डाल दिया है,लेकिन विवि की शोध समिति को इस संबंध में कोई जानकारी तक नहीं है। इस बारे में रिसर्च काउंसिल की प्रमुख व प्रति कुलपति डा. लक्ष्मी श्री बनर्जी सकारात्मक नजरिया अपनाने की दुहाई दे रही हैं(ब्रजेश मिश्र,दैनिक जागरण,जमशेदपुर,23.9.2010)।
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