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28 सितंबर 2010

हिमाचलःबेटे के दाखिले के लिए देना होगा पिता को शपथ-पत्र

स्कूलों में नशाखोरी रोकने के लिए सरकार ने नया कदम उठाया है। इसके तहत स्कूलों में बच्चों का दाखिला देने से पहले अभिभावकों को शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे कि उनका बच्चा नशा नहीं करेगा।

इसके अलावा वह खुद भी नशे से दूर रहेंगे। इस शपथ के बाद ही स्कूलों में बच्चों को दाखिला दिया जाएगा। यह शर्त नए सत्र से शुरू होगी। इसके लिए शिक्षा विभाग ने स्कूलों को सर्कुलर जारी कर दिए हैं। नशा करने पर अभिभावकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।

प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों के विभागाध्यक्षों को धूम्रपान करने वालों के चालान काटने की शक्तिदी है। सरकार ने शिक्षा विभाग को भी इस मुहिम से जोड़ दिया है। विभाग की इस मुहिम से बच्चों के घरों में भी नशामुक्त माहौल बनेगा।

सरकारी स्कूलों में जारी होने वाले अभियान के तहत प्रदेश के 15 हजार स्कूल शामिल होंगे और हर साल दो लाख से अधिक बच्चों के अभिभावकों को यह शपथ लेनी होगी।

स्वास्थ्य सुरक्षा विनियम निदेशालय के तंबाकू नियंत्रण अधिकारी डॉ. गोपाल चौहान का कहना है कि स्कूल छात्र नशे से दूर रहते है तो समाज को इस लत से दूर रखा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेको तंबाकू मुक्तबनाने के लिए पुलिस, शिक्षण संस्थानों और एनजीओ को साथ मिलाया है।

विभाग को प्रयास है कि प्रदेश का हर परिवार इस लत से दूर हो। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक राजीव शर्मा का कहना है कि सरकार के आदेशों के बाद शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी स्कूलों को सकरुलर जारी कर रहा है।
बच्चों के दाखिले के समय अभिभावकों से शपथपत्र पर हस्ताक्षर करवाए जाए कि उनके बच्चे नशे की लत से दूर रहेंगे। वे खुद भी इस आदत को छोड़ेंगे।

मानसिक तौर पर बनेंगे स्वस्थ:

बच्चों को नशे की लत से दूर रखने में अभिभावकों का अहम योगदान है। मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार यदि अभिभावक इस लत से दूर रहेंगे तो वे अपने बच्चों को इस आदत से दूर रखने में कामयाब होंगे। स्कूलों में ऐसी शर्त अभिभावकों को अधिक जिम्मेदार बनाएगी और वे अपने बच्चों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

आईजीएमसी के मनोरोग विशेषज्ञ प्रोफेसर आर.सी. शर्मा का कहना है कि बच्चों में नशे की लत घर से शुरू होती है। यदि परिवार का माहौल स्वस्थ्य होगा तो बच्चे भी मानसिक तौर पर स्वस्थ्य होंगे(दैनिक भास्कर,शिमला,28.9.2010)।

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