गलतियों के कारण सुर्खियों में रहना तो कोई पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से सीखे। बोर्ड ने इस बार भाषा के साथ अनोखा प्रयोग किया है। ऐसा प्रयोग किया कि अर्थ का अनर्थ कर डाला। 10वीं के साइंस के प्रश्न पत्र में अंग्रेजी का जो हश्र किया है ऐसा इससे पहले शायद ही हुआ हो। इस प्रश्न पत्र को शिक्षाविदों के उस पैनल ने तैयार किया है, जिनके हाथों में भावी पीढ़ियों का भविष्य है। इन गलतियों के चलते बोर्ड की कार्यप्रणाली हाशिए पर आ गई है।
पहली बार समैस्टर सिस्टम के तहत ली जा रही 10वीं की बोर्ड परीक्षा में साइंस का प्रश्न पत्र तीन भागों में आया। पार्ट ए, पार्ट बी व पार्ट सी। तीनों में ही गलतियों की भरमार थी। एक सैट में 30 सवाल थे। लगभग सभी में गलतियां थीं। बोर्ड ने एक सवाल को तीन भाषाओं (हिंदी, पंजाबी व अंग्रेजी) में पूछा था, लेकिन तीनों भाषाओं में गलतियों के चलते एक ही सवाल का मतलब अलग-अलग है।
सवाल नंबर 11 में हिंदी माध्यम में पूछा गया है कि परपोषी क्या है? पंजाबी में पूछा गया है कि पर पोषण क्या है जबकि अंग्रेजी में डिफाइन हीटैरोट्रोफिक पूछा गया है। साइंस के अध्यापकों के मुताबिक अंग्रेजी में यह सवाल अपने आप में अधूरा है।
हिंदी के सवाल के मुताबिक यहां आर्गेनेजिम और पंजाबी के सवाल के मुताबिक यहां न्यूट्रीशन आना चाहिए था। 29 नंबर सवाल के अंग्रेजी माध्यम में पीएच की फोर वेल्यू ढूंढ़ने को कहा गया है, जबकि थ्योरी ढूंढी नहीं जाती और इसका हल पीएच के साथ मिलकर होता है। इसी सवाल को हिंदी में उच्च कार्बन स्टील और अंग्रेजी में हाई क्वालिटी स्टील पूछा गया है।
भाग सी के 22 नंबर सवाल में कहा है कि जब वस्तु शीर्ष व फोक्स में होती है तो उसे चित्र के द्वारा बयान करो? क्या बयान करना है, कुछ नहीं बताया। अंग्रेजी व्याकरण की भी इसी तरह से धज्जियां उड़ाई गई हैं। अंग्रेजी में दिए दिशा निर्देशों में जो पूछा गया है उसमें ईच शब्द का प्रयोग न होने के चलते अर्थ निकलता है कि 2,2 अंकों का जवाब मांगा गया है, न कि सवालों का।
राज्य के शैक्षणिक ढांचे पर कलंक
पंजाब साइंस टीचर्ज एसोसिएशन के राज्य महासचिव संजीवन सिंह डडवाल इसे शर्मनाक व राज्य के शैक्षणिक ढांचे पर कलंक बताया। उनके अनुसार बोर्ड में फैले भ्रष्टाचार के चलते ऐसे लोग साइंस के पेपर सैट करते हैं जिनका साइंस से कोई लेना देना ही नहीं है। गलतियों की भरमार मामले की जांच में जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के सभी दावों की इस इम्तिहान ने हवा निकाल दी है।
मामले की जांच होगी
पीएसईबी के वाइस चेयरमैन डा. सुरेश टंडन ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर गलतियों की भरमार बर्दाश्त के काबिल नहीं है। इसकी हर स्तर पर जांच होगी(राणा रणधीर,दैनिक भास्कर,पटियाला,23.9.2010)।
मेरा भारत महान्………………जब नींव ही कमजोर होगी तो इमारत का तो भगवान ही मालिक है।
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