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02 सितंबर 2010

हिमाचलःआरकेएस भर्ती नीति पर फैसला न होने से डाक्टरों में रोष

रोगी कल्याण समिति भर्ती नीति को वापस लेने की मांग कर रहे डाक्टरों को सरकार के रवैये से निराशा हाथ लगी है। जिस दौरान चार सौ से अधिक आरकेएस व अनुबंध डाक्टर सामूहिक अवकाश पर थे, सरकार ने कई डाक्टरों के वेतन पर कैंची मार दी है। इसके अलावा रोगी कल्याण समिति भर्ती नीति को लेकर सरकार ने फैसला लेने संबंधी अपने वादे पर अभी तक अमल नहीं किया है। सरकार की बार-बार की वादाखिलाफी से गुस्साए डाक्टरों का कहना है कि अंतत: उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि आरकेएस भर्ती नीति के तहत तैनात डाक्टर उन्हें नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में इस सरकार के कार्यकाल में डाक्टरों की तैनाती के लिए रोगी कल्याण समिति भर्ती नीति बनाई गई थी। कुछ समय बाद मंत्रिमंडल ने 66 अनुबंध डाक्टरों को नियमित किया और बाकी के लिए छह साल की सेवा के बाद रेगुलर करने का फैसला लिया। इससे नाराज डाक्टर आंदोलन पर उतर आए। आरकेएस के तहत तैनात डाक्टरों ने सामूहिक अवकाश का फैसला लिया। तब सरकार ने उनसे वार्ता कर मसला सुलझाने की कोशिश की। सरकार के अनुरोध पर डाक्टर काम पर वापस आ गए, लेकिन उनसे किया गया वादा पूरा नहीं हुआ। इस दौरान सरकार ने कमीशन के माध्यम से सौ से अधिक डाक्टरों के पद भरने की घोषणा की। इससे आरकेएस डाक्टरों में और नाराजगी फैल गई। आरकेएस डाक्टर मांग कर रहे थे कि पहले उन्हें नियमित किया जाए। इस फैसले के बाद डाक्टर तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर चले गए। सरकार ने सख्ती करते हुए उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही, लेकिन डाक्टरों के अड़े रहने से सरकार को भी अपने कदम पीछे हटाने पड़े। फिर से वार्ता की पेशकश हुई और कहा गया कि आरकेएस नीति पर विचार किया जाएगा। डाक्टर वार्ता के लिए बुलाए जाने का इंतजार कर ही रहे थे कि इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने आंदोलन के दौरान का वेतन काट लिया। आरकेएस अनुबंध डाक्टर्स संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. दिलबाग सिंह ने कहा कि सरकार बार-बार उनसे वादाखिलाफी कर रही है। अगर डाक्टरों की जायज मांगों पर गौर नहीं किया गया तो उन्हें मजबूर होकर बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किन्नौर, बिलासपुर, घुमारवीं व मंडी में कुछ डाक्टरों का आंदोलन के दौरान का वेतन काटा गया है। उन्होंने कहा कि इससे डाक्टरों में नाराजगी है। संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि उन्हें वार्ता के लिए बुलाया जाए(दैनिक जागरण,शिमला,2.9.2010)।

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