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28 सितंबर 2010

कश्मीरःछात्रों को मोहरा बना रहे हैं अलगाववादी

कश्मीर में सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों पर पत्थरबाजी करवाने के लिए अलगाववादी नेताओं ने युवकों पर पिछले तीन माह में लगभग तीस करोड़ रुपए फूंक डाले। इस दौरान कश्मीर में भारत विरोधी हिंसा और प्रदर्शनों पर अलगाववादी संगठनों ने लगभग पचास करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि खर्च की। अपने अभियान पर अलगाववादी संगठन अब तक लगभग ८० करोड़ रुपए खर्च कर चुके हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने जो जानकारी जुटाई है उससे पता चलता है कि हवाला के जरिए भारी मात्रा में राशि अलगाववादी नेताओं के पास पहुंच रही है, जिसका इस्तेमाल राज्य के युवकों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।

आईबी ने जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय को यह भी जानकारी दे दी है कि भारत सरकार द्वारा घाटी में शांति बहाली के लिए उठाए गए कदमों को विफल करने के लिए अलगाववादी नेताओं के इशारे पर बच्चों और उनके स्कूल-कॉलेजों को भी निशाना बनाने की योजना बनाई गई है। शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों को स्कूल कॉलेज नहीं जाने की धमकी दी जा रही है, ताकि घाटी में स्कूल-कॉलेज न खुले व हालात सामान्य न हो पाए। हालांकि अलगाववादी नेताओं की धमकियों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार के साथ मिलकर सभी स्कूल-कॉलेजों और विद्यार्थियों को सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करने का फैसला किया है। आईबी और सेना के हवाले से केंद्र सरकार को जो सूचना मिल रही है वह खासी चौंकाने वाली है। इन सूचनाओं से यह साबित हो रहा है कि कश्मीर के अलगाववादी नेता अपनी कथित "आजादी" की मांग को हवा देने के लिए कश्मीर के युवकों और विद्यार्थियों के बचपन को ही झोंके दे रहे हैं। अलगाववादी संगठन छात्रों को स्कूल-कॉलेज जाने से रोक रहे हैं और बदले में उन्हें पत्थरबाजी का विशेष प्रशिक्षण दिलवा रहे हैं। इस काम में अलगाववादी संगठन भारी राशि पूंक रहे हैं। स्कूल और कॉलेज न जाने वाले विद्यार्थियों को पत्थरबारी सीखने और सेना तथा अर्द्धसैनिक बलों को मारने के बदले में "वजीफा" दे रहे हैं। इस वजीफे के तहत विद्यार्थियों से कहा जाता है कि स्कूल कॉलेज न जाकर वे पत्थरबाजी का प्रशिक्षण और धरना-प्रदर्शनों में भाग लें। घाटी में अलगाववादियों ने जवानों पर पत्थर फेंकने पर करीब ३० करोड रुपए खर्च किए हैं। घाटी के किशोरों को पैसे देकर सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने के लिए उकसाया जाता है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार कश्मीर घाटी में अलगाववादियों ने पत्थर फेंकने की एक नई रणनीति अपनाई है, जो लड़ाई करने का सस्ता और अधिक असरदार तरीका है। स्कूल और कालेज अशांति की वजह से पिछले तीन महीनों से बंद थे। अब केंद्र और राज्य सरकार ने स्कूल कॉलेज खोलने की रणनीति अपनाई तो अलगाववादी बौखला उठे हैं(मनोज वर्मा,नई दुनिया,दिल्ली,28.9.2010)।

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