राज्य सरकार का दरबार मूव होने में भले ही अभी दो माह का वक्त है लेकिन कश्मीर घाटी में हिंसा और धरना, प्रदर्शनों से परेशान सरकारी कर्मचारियों ने अपने परिवारों को जम्मू भेजना शुरू कर दिया है। तकरीबन सौ परिवार अब तक घाटी छोड़ जम्मू पहुंच चुके हैं। घाटी छोड़ने वालों में सत्ताधारी नेता भी शामिल हैं। आजादी की फिजा में सांस लेने के लिए परिवारों के जम्मू आने की यह प्रक्रिया ईद के बाद और तेज हो जाएगी। जम्मू शहर के भटिंडी, सुंजवा, चौआदी, गुज्जर नगर, खटीकां तालाब में कई परिवारों के लौटने से रौनक बढ़ी है। वहीं, सुभाष नगर में बंद पड़े कश्मीरी कर्मचारियों के करीब पंद्रह क्वार्टर खुले हैं। केएएस परीक्षा की तैयारी के लिए श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके के इमरान कुछ दोस्तों के साथ सुभाष नगर में अपने क्वार्टर में आ गए हैं। उन्होंने बताया कि श्रीनगर में ईद मनाकर वे फिर यहां आ जाएंगे। राज्य की दोनों राजधानियों में घर रखने वाले सैकड़ों कश्मीरी परिवार अप्रैल माह में कश्मीर का रुख कर लेते हैं। ये परिवार सर्दियों में वापस यहां आते हैं। अनंतनाग के डूरू इलाके में भी घर रखने वाले गुलाम कादिर ने बताया कि कश्मीर के हालात सामान्य न होने के मद्देनजर वह परिवार सहित जुलाई माह में जम्मू के वजारत रोड स्थित अपने घर में आ गए थे। कादिर ने बताया कि कश्मीर में भी रिहाईश रखने वाले दर्जन से अधिक परिवार अगस्त में जम्मू आए थे। परिवारों के नौकरीपेशा लोग श्रीनगर में हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोग ईद पर कश्मीर जाएंगे। वहीं, रेजीडेंसी रोड स्थित टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर में रोज कश्मीरी यात्रियों को लेकर पच्चीस से तीस छोटी गाडि़यां पहुंच रही हैं। जम्मू प्रोविंस टूरिस्ट टैक्सी फेडरेशन के प्रधान इंद्रजीत शर्मा ने बताया कि जम्मू से कश्मीर के लिए कम गाडि़यां जा रही हैं। शहर के बाजार में कश्मीरी ग्राहकों की आवक से दुकानदार भी उत्साहित हैं(विवेक सिंह,दैनिक जागरण,जम्मू,6.9.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।