छत्तीसगढ़ी राजभाषा का सपना जल्द ही साकार होता नजर आएगा। सरस्वती शिक्षा संस्थान ने न सिर्फ छत्तीसगढ़ी वर्णमाला तैयार की, बल्कि इसे 2 अक्टूबर से लागू करने का भी फैसला कर लिया है। पहले चरण में अरुण, उदय और पहली कक्षा के बच्चे ‘ख’ से खटिया, ‘झ’ से झउहा का पाठ पढ़ेंगे।
राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी भाषा को पाठ्यक्रमों में शामिल कब करेगी, यह तो तय नहीं, लेकिन सरस्वती शिक्षा संस्थान ने इसे अमल में लाने की तारीख तय कर ली है। सरस्वती शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित प्रदेश के तमाम स्कूलों राजभाषा का पाठ गांधी जयंती के दिन से पढ़ाए जाएंगे। इसके लिए दूसरे विषयों की तरह एक पीरियड भी रखा जाएगा।
राजभाषा की पढ़ाई इस साल निचले स्तर की तीन कक्षाओं में होगी। अरुण, उदय और पहली कक्षा के बच्चे स्थानीय भाषा से वाकिफ होंगे और ‘क’ से कबूतर की जगह कलिंदर और ‘ख’ से खरबूज की जगह ‘खटिया’ पढ़ेंगे। इन्हीं कक्षाओं के बच्चों को छत्तीसगढ़ी के अक्षर भी सिखाए जाएंगे, जिसका खाका तैयार कर लिया गया है। सरस्वती शिक्षा संस्थान ने गिनती के लिए पहाड़ा भी तैयार कर लिया है और बच्चे एक, दो के बजाय ‘एक्को एक’, ‘दोक्को दो’ पढ़ा करेंगे। मुख्यमंत्री ने पहली से पांचवीं तक छत्तीसगढ़ी पढ़ाने की घोषणा की थी।
इस दिशा में अब तक कोई पहल तो नहीं हो सकी, अलबत्ता सरस्वती शिक्षा संस्थान इस मामले में एक कदम आगे बढ़ गया है। सरस्वती शिक्षा संस्थान परिसर रायपुर में छत्तीसगढ़ी शिक्षा सेवा न्यास के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र दुबे की अध्यक्षता में शनिवार को बैठक हुई।
इसी बैठक में जनभाषा - राजभाषा - मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के नारे के साथ अध्यापन शुरू करने का फैसला लिया गया। बैठक में रविशंकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व्यासनारायण दुबे, छत्तीसगढ़ी राजभाषा मंच के प्रातीय संयोजक नंदकिशोर शुक्ल, जागेश्वर प्रदसाद, शारदा प्रसाद शर्मा, राधेश्याम देवांगन, यशवंत यदु, मनोज कुमार देवांगन, भागवत दास अस्तुरे प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
ऐसी होगी वर्णमाला.अरुण-उदय के बच्चों को छत्तीसगढ़ी में रोचक शब्द पढ़ाए जाएंगे। इसके लिए बनाई जा रही वर्णमाला में क-कलिंदर, ख-खटिया, ग-गनेस, फ-फटफटी, झ-झउहा, ट-टुकनी, च-चक्का, प-पताल, फ-फटफटी, र-रमकेरिया और ऐसे ही छत्तीसगढ़ी शब्द शामिल किए गए हैं(दैनिक भास्कर,बिलासपुर,6.9.2010)।

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