उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के सुझावों के लिए कुलपति प्रो.हर्ष कुमार सहगल की अध्यक्षता में गठित कुलपतियों की समिति ने शासन से विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कालेजों के सभी पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर प्रणाली लागू करने की सिफारिश की है। समिति ने विवि की परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्रों के स्वरूप में बदलाव के साथ बैक पेपर को खत्म करने का सुझाव दिया है। परीक्षा उत्तीर्ण करने के मानक में भी तब्दीली की वकालत की है। कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.हर्ष कुमार सहगल ने शासन को सौंपी रिपोर्ट में साल में दो सेमेस्टर लागू करने का सुझाव दिया है। प्रत्येक सेमेस्टर में एक छात्र को अधिकतम चार थ्योरी और दो प्रैक्टिकल कोर्स करने की संस्तुति की गई है। समिति के मुताबिक प्रत्येक थ्योरी कोर्स में हर सेमेस्टर में एक घंटे की अवधि के न्यूनतम 42 लेक्चर होने चाहिए। थ्योरी कक्षाओं में छात्रों की कठिनाई को दूर करने के लिए हर तीन लेक्चर पर एक ट्यूटोरियल की सिफारिश की गई है। प्रत्येक सेमेस्टर में तीन घंटे की अवधि के न्यूनतम 14 प्रैक्टिकल कराने की संस्तुति की गई है। समिति ने कहा है कि फेल होने वाला कोई छात्र अधिकतम दो कोर्स को अगले सेमेस्टर में कैरी फारवर्ड कर सकता है। लेकिन यदि वह चार से अधिक कोर्स में फेल हो जाता है तो उसे अगले सेमेस्टर में पंजीकृत होने से पहले इस बैकलॉग से पार पाना होगा। समिति के अनुसार थ्योरी पेपर 50-50 प्रतिशत अंकों वाले दो खंडों में बंटा होना चाहिए। पहले खंड में बहुविकल्पीय प्रश्न और दूसरे में छोटे उत्तरों वाले आठ से 10 सवाल होने चाहिए। दोनों खंडों में कम से कम 40-40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाला छात्र ही पास माना जाए। समिति ने सुझाव दिया है कि विवि में संकाय अध्यक्ष और विभागाध्यक्ष के पदों पर नियुक्ति का आधार सिर्फ वरिष्ठता ही नहीं, काम भी होना चाहिए। समिति ने ऐसे पदों पर एक समय में एक ही व्यक्ति को तैनात करने की वकालत की है। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि विवि का परीक्षा नियंत्रक सीधे कुलपति के प्रशासनिक नियंत्रण में होना चाहिए। परीक्षा नियंत्रक सरकारी प्रशासनिक सेवा या वित्तीय संवर्ग का नहीं होना चाहिए। वह आईएएस/आईपीएस सेवा का रिटायर्ड अधिकारी या कोई सेवानिवृत्त शिक्षक हो सकता है जिसे परीक्षा प्रणाली की गहरी समझ हो। विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रकों के खाली पदों को भरने के लिए समिति ने मुख्य सचिव द्वारा सर्च कमेटी गठित करने का सुझाव दिया है जिसमें संबंधित विवि के कुलपति भी शामिल हों(राजीव दीक्षित,दैनिक जागरण,लखनऊ,29.9.2010)।
अच्छी जानकारी है। धन्यवाद ।
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