देश में आजादी की लड़ाई के दौरान बने स्कूलों के दिन अब बहुरने वाले हैं। इन स्कूलों को हेरिटेज की श्रेणी में रखा गया है। एनसीईआरटी इन हेरिटेज स्कूलों का उद्धार करेगा। हेरिटेज स्कूलों के चुनाव के लिए एनसीईआरटी ने एक कमेटी बनाई है। एनसीईआरटी द्वारा जारी सरकुलर में कहा गया है कि प्रमुख शिक्षाविदों द्वारा स्थापित और आजादी के बाद इतिहास में खो चुके स्कूलों की चिंता एनसीईआरटी को हो है। इन स्कूलों में फिर से जान डालने के लिए देशभर के विभिन्न हिस्सों से स्कूलों का चुनाव किया जाएगा। एनसीईआरटी ने नवीनीकरण की इस प्रक्रिया को मिशन हेरिटेज स्कूल का नाम दिया है। इन स्कूलों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य समाज को शिक्षित करने के साथ-साथ उसे नई दिशा प्रदान करना था। नवीन विचारों के अभाव और आर्थिक स्रोतों में कमी की वजह से ये स्कूल बेजान हो गए हैं। ऐसे में उनमें फिर से जान फूंकने के लिए यह कदम उठाया गया है। हेरिटेज स्कूलों का चयन आजादी के दौरान नेशनलिस्ट एजुकेशन फिलॉसफी से प्रभावित अध्यापन के नए तरीकों, घरेलू ज्ञान का प्रयोग करते हुए नई पठन-पाठन सामग्री तैयार करने जैसे मानकों के आधार पर किया जाएगा। इन स्कूलों को पुनर्जीवित करने के लिए आर्थिक और शैक्षिक सहायता प्रदान की जाएगी और सहायता प्राप्त होने के बाद इनमें हो रहे बदलावों की जांच नियमित अंतराल पर की जाएगी(दैनिक जागरण,दिल्ली,7.9.2010)।
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