.डीयू में सेमेस्टर सिस्टम के तहत 20 नवम्बर से परीक्षाएं होंगी पर कॉलेजों में शिक्षकों का टोटा खत्म नहीं हुआ है। नियमित शिक्षक पढ़ा नहीं रहे हैं। तदर्थ शिक्षकों की बहाली पर डीयू ने नेट की अनिवार्यता को लागू कर दिया है, ऐसे में विभिन्न विषयों में शिक्षकों की कमी के चलते पढ़ाई ठप है।
यूजीसी ने डीयू प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह जल्द अपने यहां नॉन नेट तदर्थ शिक्षकों को बहाल करें। यूजीसी की ओर से यह आदेश मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मार्फत जारी किया गया है। मंत्रालय की ओर से साफ किया गया है कि नई सेवा शर्तो के तहत विवि में होने वाली नियमित व तदर्थनियुक्तियों में ऐसे शिक्षकों के मौका नहीं दिया जाएगा, जो नेट या यूजीसी के नए नियमों के तहत पीएचडी पास न हो।
हालांकि इस समूची व्यवस्था से दो साल के लिए उन शिक्षकों को राहत दी गई है, जो पूर्व में कैम्पस के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं, इन शिक्षकों को नेट की अनिवार्यता को पूरा करने के लिए यह राहत दी गई है।
ऑल इंडिया रिसर्च कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु कुमार ने बताया कि सरकार के दो अलग-अलग आदेशों के पालन को लेकर डीयू के रवैये का ही परिणाम है कि 300 से ज्यादा नॉन नेट तदर्थशिक्षक आज भी बहाली का इंतजार कर रहे हैं और यह स्थिति तब है, जबकि कॉलेजों में इकोनॉमिक्स, इंग्लिश व कम्प्यूटर साइंस जैसे लोकप्रिय कोर्सो में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
सुधांशु कुमार ने बताया कि यूजीसी ने 31 अगस्त को आदेश जारी कर डीयू प्रशासन को निर्देशित किया है कि वह नियमों के तहत पूर्व में कार्यरत नॉन नेट तदर्थ शिक्षकों को पुन: बहाल करें और उन्हें अप्रैल 2011 तक का समय दें(दैनिक भास्कर,दिल्ली,6.9.2010)।
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