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22 सितंबर 2010

जनरल स्टडीज फॉर आईएएस

देश की प्रतिष्ठित और कठिनतम सिविल सेवा परीक्षा (आईएएस-2010) का द्वितीय चरण, यानी ‘मुख्य परीक्षा’ 29 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) द्वारा आयोजित की जाने वाली इस परीक्षा में जनरल स्टडीज का पेपर अपने विशाल सिलेबस के कारण सभी विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। यूपीएससी इस परीक्षा के माध्यम से ऐसे प्रशासनिक अधिकारियों का चयन करती है, जो भविष्यदर्शी हों। 600 अंकों के जनरल स्टडीज के पेपर में 300-300 अंकों के प्रथम और द्वितीय, दो प्रश्न-पत्र होते हैं।

प्रथम प्रश्न-पत्रः इसमें आधुनिक भारत का इतिहास एवं संस्कृति, भूगोल, संविधान व राज व्यवस्था, समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दे एवं सामाजिक प्रासंगिकता से संबंधित विषय सम्मिलित होंगे।

आधुनिक भारत का इतिहास एवं संस्कृति
इस खंड के तहत आधुनिक भारत के इतिहास में 19वीं शताब्दी के लगभग मध्य से देश के इतिहास से संबंधित प्रश्न होंगे। स्वतंत्रता आंदोलन तथा सामाजिक सुधारों को रूप देने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। भारतीय संस्कृति से संबंधित भाग में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक भारतीय संस्कृति के सभी पहलू होंगे। साहित्य और कला की प्रमुख विशेषताओं पर भी प्रश्न पूछ जाएंगे। इसके लिए 11वीं और 12वीं की एनसीईआरटी की पुस्तकों के साथ-साथ विपिनचंद्र की ‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ नामक पुस्तक का अध्ययन करते हुए नियमित लेखन का अभ्यास करें। साथ ही अपनी आवश्यकता के अनुसार सारगर्भित नोट्स भी तैयार करें।

भारत का भूगोल
इसके अंतर्गत भारत के भौतिक, आर्थिक और सामाजिक भूगोल से संबंधित प्रश्न आएंगे। आमतौर पर इस खंड के प्रश्न आर्थिक और सामाजिक संदर्भों जैसे भारतीय कृषि, व्यापारिक दशाएं, जनजातीय एवं नगरीय स्वरूप आदि से संबंधित होते हैं। भौतिक भूगोल खंड से मानसून, चक्रवात, प्रतिचक्रवात जैसे प्रश्न अवधारणा और इनके प्रभावों की समीक्षा से संबंधित हो सकते हैं। इस खंड के अध्ययन में प्रश्नानुरूप मानचित्र का भी उपयोग करें, जो आपके भौगोलिक ज्ञान का परिचायक होगा। एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं से 12 तक की पुस्तकों का अध्ययन कर संभावित मुद्दों पर संक्षिप्त टिप्पणियां तैयार करें। परीक्षा नजदीक आने पर ये संक्षिप्त नोट्स आपके काफी काम आएंगे। हाल में आयी बाढ़, सूखे एवं अन्य जलवायविक परिवर्तन आपके प्रश्नों के आधार बन सकते हैं।

भारत का संविधान व राज व्यवस्था
इस भाग के अंतर्गत भारत का संविधान और संवैधानिक, विधिक, प्रशासनिक एवं देश में प्रचलित राजनीतिक व्यवस्था से उभरने वाले विभिन्न मुद्दों पर प्रश्न होंगे। इस खंड का वास्तविक उद्देश्य अभ्यर्थियों के संवैधानिक ज्ञान एवं जिस सेवा के लिए प्रयास कर रहे हैं, उसके वास्तविक कार्यप्रणाली से जुड़े प्रसंगों को जांचना भी है। इस खंड के प्रश्न ज्यादातर समसामयिक संदर्भों से होते हैं। ऐसे में विभिन्न विधिक एवं संवैधानिक परिवर्तनों से संबंधित प्रसंगों की अनदेखी न करें। कोशिश करें कि दिन-प्रतिदिन के प्रशासनिक उत्तरदायित्व पर आप महारत हासिल कर लें। अध्ययन के लिए राज व्यवस्था से संबंधित एनसीईआरटी की पुस्तकों के साथ सुभाष कश्यप की ‘हमारा संविधान एवं हमारी संसद’ नामक पुस्तक का अध्ययन अवश्य करें।

समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दे व सामाजिक प्रासंगिकता
इसके जरिए अभ्यर्थी की समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दों एवं वर्तमान भारत की सामाजिक प्रासंगिकता जैसे विषयों के प्रति जागरूकता की परीक्षा ली जाती है। इसके अंतर्गत इन विषयों से संबंधित तैयारी की जरूरत पड़ती है- (1) भारतीय अर्थव्यवस्था एवं योजना संसाधनों के जुटाव, विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे, (2) विकास के लाभों से व्यापक वर्गों के सामाजिक एवं आर्थिक वास्तवीकरण से उभरने वाले मुद्दे, (3) मानव संसाधन के विकास एवं प्रबंध से संबंधित अन्य मुद्दे, (4) स्वास्थ्य के मुद्दे जिसमें लोक स्वास्थ्य प्रबंधन, स्वास्थ्य शिक्षा एवं स्वास्थ्य की देखभाल से संबंधित नैतिक सरोकार, चिकित्सकीय अनुसंधान तथा औषधि निर्माण व अनुसंधान, (5) विधि प्रवर्तन, आंतरिक सुरक्षा तथा संबंधित मुद्दे, जैसे सामुदायिक सामंजस्य का परीक्षण, (6) मानवाधिकारों के अनुरक्षण एवं लोकजीवन में सत्यनिष्ठा समेत सुशासन एवं नागरिकों के प्रति उत्तरदायित्व से संबंधित मुद्दे, (7) पर्यावरण से जुड़े मुद्दे, पारिस्थितिकी परिरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों एवं राष्ट्रीय विरासत का संरक्षण आदि।
इस खंड के अध्ययन के लिए शासकीय नीतियों का समर्थन करते हुए सुधारात्मक उपायों के अध्ययन पर विशेष ध्यान दें। इस तथ्य का विशेष ध्यान रखें कि उत्तर लेखन पूर्वाग्रह से ग्रसित न हो। इस भाग पर पकड़ मजबूत करने के लिए ‘द हिन्दू’, ‘भारत-2010’, ‘योजना’, ‘कुरुक्षेत्र’ आदि जरूर पढ़ें।

द्वितीय प्रश्न-पत्र की तैयारी
द्वितीय प्रश्न-पत्र में भारत के विश्व के प्रमुख देशों के साथ सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक संबंधों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके तहत पारस्परिक आर्थिक क्रिया, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में विकास, अंतरराष्ट्रीय मामले एवं संस्थाएं, सांख्यिकी विश्लेषण, आलेख तथा रेखाचित्र से संबंधित प्रश्न पूछ जाएंगे।

-भारत और विश्वः इसमें भारत के विश्व के प्रमुख देशों के साथ सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक संबंधों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। ये विषय जरूर पढ़ें - भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध एवं विदेशी मामले, सुरक्षा एवं रक्षा संबंधी मामले, नाभिकीय नीति, विदेशों में भारतवंशी और इनका भारत तथा विश्व को योगदान। इस खंड के लिए भारत-पाक, भारत-श्रीलंका, भारत-चीन, भारत-अमेरिका के संबंधों पर ध्यान देते हुए भारत की परमाणविक नीति एवं इसके प्रावधान और परिणाम के बारे में अनिवार्य रूप से अध्ययन करें। संबंधों के निर्धारण पर तटस्थ दृष्टिकोण प्रस्तुत करें जो कुशल प्रशासनिक अधिकारी के लक्षण होते हैं। अध्ययन हेतु समाचार-पत्रों एवं दूरदर्शन की परिचर्चा पर विशेष ध्यान केंद्रित करें।

-भारत के अन्य देशों के साथ आर्थिक संबंधः इस खंड में आर्थिक एवं व्यापारिक मुद्दों, जैसे विदेश व्यापार, विदेशी निवेश, तेल, गैस एवं ऊर्जा प्रवाह से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अलावा आर्थिक मुद्दों पर भारत के अन्य देशों एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ पारस्परिक आर्थिक क्रिया को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, विश्व व्यापार संगठन आदि के बारे में भी सवाल पूछे जाते हैं। इस खंड का वास्तविक उद्देश्य अभ्यर्थी का वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर ज्ञान का परीक्षण करना है और मुख्यतः इस तथ्य का भी कि भारत की वैश्विक स्थिति क्या है। इस खंड के अध्ययन हेतु भारत 2010, समाचार-पत्र, पत्रिकाएं एवं दूरदर्शन की परिचर्चाओं पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ मंत्रिमंडलीय समीक्षा का भी अध्ययन अपेक्षित है।

-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में विकासः इस खंड के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के परिवर्तित आयाम एवं अनुसंधान, सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र, अंतरिक्ष कार्यक्रम के उद्देश्य व लाभ, कम्प्यूटर रोबोटिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी, बॉयोटेक्नोलॉजी तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित प्रश्न होते हैं। इस खंड का उद्देश्य अभ्यर्थी की नवीन तकनीकि के प्रति रुझान का परीक्षण करना है। वैश्विक संदर्भ में विकास के विभिन्न आयाम वैज्ञानिक संदर्भों में संभव हो रहे हैं। अतः तीक्ष्ण दृष्टि से छोटे-छोटे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। अध्ययन के लिए ‘विज्ञान प्रगति’ तथा ‘द हिन्दू’ के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड का अध्ययन करें।

-अंतरराष्ट्रीय मामले एवं संस्थाएं- इस खंड में वैश्विक मामलों, जैसे अफ्रीका एवं ऑस्ट्रेलिया में नस्लवाद का स्वरूप, ईरान एवं इराक में हुए परिवर्तन, अमरिका की वैश्विक आतंकवाद में पहल आदि और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ, सार्क, नाटो आदि का तथ्यात्मक एवं अवधारणात्मक आधार पर अध्ययन किया जाए।

-सांख्यिकी विश्लेषण, आरेख एवं रेखाचित्र ः इस खंड में दंडारेख, पाई आरेख एवं रेखाचित्रों के रूप में प्रश्न होंगे। यह खंड सर्वाधिक अंकदायी होता है। यदि अभ्यर्थी इस खंड का खूब अभ्यास करें तो पूरे अंक मिलने की संभावना रहती है। अतः इस खंड का नियमित अभ्यास करें। अभ्यास के लिए एनसीईआरटी की सांख्यिकी की पुस्तक का सहयोग ले सकते हैं।

उत्तर संबंधी महत्वपूर्ण टिप्स
जीएस में आमतौर पर 20, 150 व 250 शब्दों के प्रश्न पूछे जाते हैं-
-20 शब्दों के प्रश्न के लिए तथ्यात्मक परिचय दें।
-150 शब्दों के प्रश्न के लिए परिचयात्मक एवं विश्लेषण पक्ष पर ध्यान दें।
-250 शब्दों के प्रश्न के लिए परिचयात्मक एवं विश्लेषणात्मक निष्कर्ष पर ध्यान दें।
-बीते वर्षों के प्रश्न-पत्रों का विश्लेषण जरूर करें।
-8वीं से 12वीं तक की एनसीईआरटी की पुस्तकों से संक्षिप्त टिप्पणी तैयार करना उपयोगी होता है।
(अमर उजाला,दिल्ली,22.9.2010)

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