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22 सितंबर 2010

मध्यप्रदेशःबीएड-एमएड कॉलेजों में अब समान फीस। कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले

कालेजों में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना एनएसएस का अब स्वैच्छिक संगठन के रूप में पंजीयन कराया जाएगा। ताकि युवाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए एनएसएस निचले स्तर तक एनजीओ के रूप में कार्य कर सके। रासेयो की गतिविधियों को गति देने के लिए कलेक्टर कलेक्टर की अध्यक्षता में हर जिले में समन्वय समितियों का गठन किया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकान्त शर्मा ने एनएसएस की मंगलवार को मंत्रालय में राज्य स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित करते हुए हायर सेकंडरी स्कूलों में भी एनएसएस की इकाईयां स्थापित करने के निर्देश दिए। श्री शर्मा ने कहा कि बैठक में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि एवं कृषि विवि में भी एन.एस.एस. की ईकाई स्थापित की जाए। आगामी स्वतंत्रता दिवस पर जिलों में आयोजित परेड में एनएसएस दल की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश भी उच्च शिक्षा मंत्री ने दिए।

बैठक में यह भी तय किया गया कि पचमढ़ी और चित्रकूट में युवा समागम आयोजित किया जाएगा, जिसमें एन.एस.एस. और एन.सी.सी. आदि के उत्कृष्ट विद्यार्थी शामिल होंगे। सरकारी योजनाओं से जुड़ने एनजीओ बनेगा एनएसएस शिक्षकों ने चुना मनमाना स्कूल, अध्यापकों की काउंसलिंग कल दो सत्रों की फीस पर कमेटी ने काम पूरा कर लिया है। गुरूवार तक कालेजों को फीस की जानकारी दे दी जाएगी ताकि अगले सत्र की काउंसलिंग के पहले कोई छात्र दुविधा में न रहे। डॉ. सुनील कुमार, ओएसडी फीस कमेटी भोपाल (मुसं)। हंगामे के साथ शुरू हुई शिक्षकों की काउंसलिंग का माहौल शाम होते-होते खुशनुमा हो गया। काउंसलिंग में शामिल सौ फीसदी शिक्षक अपना पसंदीदा स्कूल लेकर रवाना हुए। वहीं अध्यापक संवर्ग की सारी आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया गया। इनकी काउंसलिंग अब गुरूवार को होगी। जिले के अतिशेष शिक्षकों व अध्यापकों के युक्तियुक्तकरण के लिए काउंसलिंग मंगलवार को उत्कृष्ट विद्यालय में आयोजित की गई। मगर काउंसलिंग शुरू होते ही अध्यापक संवर्ग ने आवाज उठा दी। अध्यापक संवर्ग के नेता उपेंद्र कौशल की आपत्ति थी कि पदस्थापना में पहला मौका अध्यापकों को मिलना चाहिए। स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए उन्होंने काउंसलिंग में भी पहला अधिकार अध्यापकों का बताया। जिला शिक्षा अधिकारी सीएम उपाध्याय और उत्कृष्ट प्राचार्य राजेश तिवारी ने उन्हें नियम दिखाए। बावजूद इसके अध्यापक अपनी मांग पर अड़े रहे। बार-बार समझाने के बाद भी न मानने पर अधिकारियों ने इनकी आपत्ति को दरकिनार कर दिया। साथ ही शिक्षक संवर्ग की काउंसलिंग शुरू कर दी। दोपहर तक महिलाओं को उनके पसंद का स्कूल चुनने का मौका देने के बाद पुरूष शिक्षकों को बुलाया गया। शाम करीब सात बजे तक चली काउंसलिंग में कुल 137 शिक्षकों ने अपनी पदस्थापना के लिए स्कूलों का चयन किया। इतना ही नहीं, करीब एक दर्जन शिक्षकों ने पूरी प्रक्रिया की सराहना करते हुए रजिस्टर में अपने विचार भी दर्ज किए। अब केवल अध्यापक संवर्ग की काउंसलिंग बची है।

जिले में 97 अध्यापक अतिशेष की सूची में शामिल किए गए हैं। इन सभी को अब गुरूवार को बुलाया गया है। नर्सिग की दुकान चलाने वाले कालेजों पर गिरेगी गाज भोपाल (मुसं)। नर्सिग शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नर्सिग महाविद्यालयों की गहन समीक्षा की जाएगी। अपात्र और गैर हाजिर विद्यार्थियों को डिग्री देने वाले कालेजों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने नर्सिग में चुनौतियां व भविष्य की रणनीति विषय पर राज्य स्तरीय सम्मेलन में मंगलवार को यह बात कही। यह एक दिवसीय सम्मेलन प्रशिक्षित नर्स एसोसिएशन की मध्यप्रदेश शाखा द्वारा प्रज्ञान नर्सिग कालेज के सहयोग से आयोजित किया गया था। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नर्सिग में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए बरकतउल्ला विवि द्वारा इसी साल पी.एच.डी. प्रारंभ की जा रही है। अन्य विवि में भी इसकी व्यवस्था के प्रयास किए जाएंगे। नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। इसकी परीक्षाएं समय पर कराने के लिए शैक्षणिक कैलेन्डर का सख्ती से पालन किया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्वस्थ समाज बनाने में नर्सो का महत्वपूर्ण योगदान है। स्वास्थ्य राज्यमंत्री श्री हार्डिया ने कहा कि प्रदेश में नर्सो के चार हजार पद स्वीकृत किए गए हैं। सरकार ने सरकारी कॉलेजों के साथ ही प्रायवेट नर्सिग कॉलेज के विद्यार्थियों को भी शासकीय सेवा में लेने के लिए छूट प्रदान की है। इसके साथ ही नर्सो के लिए समयमान वेतनमान और ब्रम्हस्वरूप समिति की रिपोर्ट शीघ्र लागू की जाएगी। इस मौके पर श्री शर्मा ने एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित न्यूज बुलेटिन नर्सेस वॉयस एवं वेबसाइट का लोकार्पण भी किया गया। नर्सिग विशेषज्ञ डीन पी.जी.कॉलेज ऑफ नर्सिग भिलाई डॉ. माया.ई.पाटलिया, एसोसिएशन की भोपाल शाखा की अध्यक्ष डॉ. सुनीता लॉरेन्स विशेष रूप से मौजूद थीं।
बीएड और एमएड की फीस को लेकर विवाद अब नहीं रहेगा। वर्तमान दोनों सत्रों में बीएड की फीस एक समान रहेगी। वहीं इसमें तकनीकी पाठ्यक्रमों की तरह कालेजवार अलग-अलग स्लेब भी नहीं होंगे। तीन सौ कालेजों में एक जैसी फीस रहेगी। जबकि 83 कालेज फीस के मामले में प्रदेश भर में कमजोर नजर आएंगे। मप्र शुल्क एवं प्रवेश निर्धारण कमेटी ने बीएड और एमएड की फीस पर मशक्कत पूर्ण कर ली है। सत्र 2009-10 और 2010-11 की फीस गुरूवार को घोषित की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार दो साल से प्रवेश न होने के कारण कमेटी ने दोनों ही सत्रों की फीस एक समान ही रखने का मन बनाया है। बताया जाता है कि कालेज संचालकों का भी मत यही था कि जो भी फीस हो वह सभी जगह समान हो। हालत यह है कि नई फीस के लिए प्रस्ताव भी सभी ने समान दिया था। राज्य शासन और अदालत द्वारा घोषित अंतरिम फीस के आसपास ही फीस रखने की इच्छा जताई थी। फीस कमेटी का फैसला भी इसी के इर्दगिर्द रहने की उम्मीद है। फीस निर्धारण प्रक्रिया में विश्वास जताते हुए कमेटी को प्रस्ताव देने वाले कालेजों को बीएड की फीस 25 हजार रुपए मिल सकती है। कमेटी द्वारा की गई सुनवाई में तीन सौ कालेज पहुंचे थे।

83 को मिलेगा दंड : इस सुनवाई में 83 कालेज शामिल नहीं हुए थे। नोटिस देने के बाद भी इन कालेजों ने न तो रिकार्ड ही भेजा और न कोई प्रस्ताव दिया। इन कालेजों पर कमेटी पेनाल्टी लगा सकती है। इसके तहत ऐसे कालेजों की फीस में दस रुपए तक की कटौती की जा सकती है। ऐसे तमाम कालेजों को दोनों सत्र 15 हजार में काटना पड़ सकते हैं।

एमएड होगा 40 हजारी : मास्टर ऑफ एजूकेशन एमएड की फीस 35 से 40 हजार रुपए तक रखी जा सकती है। बताया जाता है कि कालेजों ने 30 से 50 हजार रुपए के बीच ही प्रस्ताव दिए थे। इसके लिए भी सभी ने समान फीस का सुझाव दिया था। इसे मान्य करते हुए कमेटी सभी कालेजों का समान स्टेटस रखने पर विचार कर रही है। अगले सत्र से मिली गति : उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सत्र 2010-11 की काउंसलिंग अक्टूबर में कराने पर विचार किया जा रहा है। इसे देखते हुए कमेटी ने भी फीस की ताबड़तोड़ तैयार कर ली। ताकि काउसंलिंग शुरू होने के पहले फीस की घोषणा हो जाए। इससे प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी परेशान न हों। वैसे भी दो साल प्रवेश न होने से किसी भी कालेज ने आय-व्यय का ब्यौरा नहीं दिया था। अब दोनों सत्रों में प्रवेश के साथ ही परीक्षा भी हो रही है। इसे देखते हुए सत्र 2011-12 की फीस बैलेंसशीट के आधार पर ही तय की जाएगी(दैनिक जागरण,भोपाल,22.9.2010)।

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