ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसपी सिंह ने कार्यालय की कार्य संस्कृति में सुधार का प्रयास शुरू कर दिया है।
इसके लिए कई समितियों का गठन कर सितंबर के अंत तक प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया है ताकि इसका कार्यान्वयन किया जा सके। यूजीसी के शैक्षिक गतिविधियों के तहत आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत देश के अंदर या एनआरआई में से प्रतिष्ठित विद्वानों को आमंत्रित कर व्याख्यान का आयोजन किया जायेगा ताकि छात्रों के साथ ही शिक्षक भी इससे लाभान्वित हो सकें।
ऐसे आयोजनों का व्ययभार यूजीसी वहन करेगा। इसके लिए एक सर्च कमिटी का गठन किया गया है जिसके संयोजक कुलानुशासक डा. तारानंद झा जबकि सदस्यों में विज्ञान संकायाध्यक्ष डा. जयकर झा एवं सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष डा. सरला मालवीय, बनायी गयी है।
इसरो, सीएसआईआर, सार्वजनिक उपक्रमों सहित अन्य ऐसे संस्थान जहां शिक्षण व शोध होता है, के विद्वानों व शोधकर्ताओं की सूची बनायी जायेगी और समय-समय पर इसी सूची से विद्वानों को आमंत्रित किया जायेगा। इसी प्रकार उन्नत कार्यशाला, शिक्षण एवं शोध कार्यो में विशिष्टता लाने के मद्देनजर सुझाव देने के लिए एक अन्य समिति का गठन किया गया है जिसके प्रतिवेदन आने पर इसका कार्यान्वयन किया जायेगा।
समिति में लगभग सभी संकायाध्यक्षों को शामिल किया गया है। डा. जयकर झा के संयोजकत्व में गठित इस समिति में डा. सरला मालवीय, डा. चितरंजन राय एवं डा. हरिश्चंद्र प्रसाद को शामिल किया गया है। यूजीसी के निर्देश के आलोक में सर्वप्रथम स्नातकोत्तर स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जायेगा।
समिति इसे लागू करने के तरीके, इसमें होने वाली कठिनाइयों तथा इसके निदान के उपाय से संबंधित सुझाव देगी। विश्वविद्यालय एवं विश्वविद्यालय विभागों में कीमती उपकरणों की खरीदारी में हो रही गड़बड़ी को दूर करने के लिए सुझाव देने के लिह विज्ञान संकायाध्यक्ष डा. जयकर झा को अधिकृत किया गया है। डा. झा अपना प्रतिवेदन कुलपति को सौपेंगे। इन तमाम प्रतिवेदनों पर अक्टूबर के पहले सप्ताह में विचार के बाद इसका क्रियान्वयन शुरू होगा(हिंदुस्तान,दरभंगा,22.9.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।