मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

28 सितंबर 2010

डीयू प्रशासन शिक्षकों से लेगा अंडरटेकिंग। हाजिरी लगाने का आदेश

सेमेस्टर सिस्टम का विरोध कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों को लेकर डीयू प्रशासन ने कठोर रवैया अपना लिया है। डीयू प्रशासन ने कॉलेजों के प्राचार्यो को आदेश जारी किया है। इसमें सेमेस्टर सिस्टम से पढ़ाने के लिए शिक्षकों से अंडरटेकिंग भरवाने की बात कही गई है। जिसमें शिक्षक बताएंगे कि वे सेमेस्टर सिस्टम से पढ़ाना चाहते हैं या नहीं। इसके बाद ऐसे शिक्षकों के वेतन काटने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। डीयू के रजिस्ट्रार की ओर से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि डीयू में विज्ञान के 13 कोर्सो में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है, जो कानूनी रूप ले चुका है। शिक्षक डीयू के कानून का पालन करें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें। डीयू प्रशासन ने अंडरटेकिंग फार्म भी कॉलेजों को भेज दिया है(दैनिक जागरण,दिल्ली,28.9.2010)।
------------------------------------------------------------------------------------------
' नो वर्क नो पे' का बाउंसर फेंकने के बाद डीयू ने अब एक और कड़ा कदम उठाया है। अभी तक टीचर्स पर हाजिरी का नियम लागू नहीं था लेकिन सोमवार को जारी आदेश में यूनिवर्सिटी ने टीचर्स को भी हाजिरी सिस्टम के दायरे में ला दिया है। सभी कॉलेजों के टीचर्स को भी अब अपनी हाजिरी लगानी होगी। इसके लिए हर कॉलेज में हाजिरी रजिस्टर बनाने का निर्देश दिया गया है।

कॉलेज के ऑफिस में हाजिरी रजिस्टर रहेगा और टीचर्स को अपनी हाजिरी मार्क करनी होगी। यही नहीं साइंस के वे टीचर्स जो ग्रैजुएशन लेवल पर फर्स्ट सेमेस्टर के स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं, उनसे अंडरटेकिंग लेने का भी फैसला किया गया है। जो टीचर सेमेस्टर से पढ़ाने की अंडरटेकिंग नहीं देंगे, उनकी सितंबर महीने की सैलरी रिलीज नहीं होगी, साथ ही सेमेस्टर से न पढ़ाने वाले टीचर्स को 21 जुलाई से मिली सैलरी और अलाउंस भी वापस ले लिया जाएगा।

यूनिवर्सिटी ने अंडरटेकिंग का परफॉर्मा भी जारी कर दिया है। टीचर्स को सेमेस्टर से पढ़ाने की तो अंडरटेकिंग देनी ही होगी, साथ ही उसे यह भी कहना होगा कि अभी तक पढ़ाई का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाएगी। टीचर्स को 30 सितंबर तक हर हाल में अंडरटेकिंग देनी होगी, नहीं तो इस बार उन्हें सितंबर महीने की सैलरी नहीं मिल पाएगी और पिछली सैलरी भी वापस ली जाएगी। खास बात यह है कि टीचर्स को हाजिरी के दायरे में लाना और उनसे अंडरटेकिंग लेने का यह फैसला यूनिवर्सिटी ने पहली बार लिया है।

दरअसल, 23 सितंबर को यूनिवर्सिटी ने नो वर्क नो पे का आदेश जारी किया था लेकिन कॉलेजों ने कहा था कि जब टीचर्स की हाजिरी ही नहीं लगती तो उन्हें किस तरह से पता चलेगा कि कौन से टीचर क्लास ले रहे हैं और कौन से नहीं? इसके बाद वाइस चांसलर ने सोमवार को हाजिरी का यह आदेश लागू कर दिया।

यूनिवर्सिटी ने अपने आदेश में कहा है कि ज्यादातर कॉलेजों में सेमेस्टर के हिसाब से पढ़ाई हो रही है लेकिन कुछ कॉलेजों में टीचर्स सेमेस्टर से नहीं पढ़ा रहे हैं और पुराने सिस्टम को ही फॉलो कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी का कहना है कि ऐसे टीचर्स के खिलाफ कार्रवाई करने का वक्त आ गया है क्योंकि उनके कारण स्टूडेंट्स की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है।

आदेश में कहा गया है कि हड़ताल और आंदोलन के कारण अगर स्टूडेंट्स की पढ़ाई का नुकसान होता है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और यह टीचिंग प्रफेशन के भी खिलाफ है। 21 जुलाई से नया सेशन शुरू हुआ था और अब तक टीचर्स के आंदोलन के कारण 16 दिन की पढ़ाई बर्बाद हो चुकी है और इसकी भरपाई की जानी जरूरी है। यूनिवर्सिटी ने अपने इस आदेश की कॉपी एचआरडी, यूजीसी और दिल्ली सरकार को भी भेजी है(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,28.9.2010)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।