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02 सितंबर 2010

बीएड वालों की प्राइमरी में सीधे नियुक्ति

*केन्द्र सरकार ने गजट में नोटीफिकेशन किया
*यूपी के पाँच लाख छात्रों को होगा फायदा

शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद शिक्षकों की कमी से जूझ रहे प्रदेशों को राहत देते हुए एनसीटीई ने बीएड उत्तीर्ण छात्रों का प्राइमरी स्कूलों में नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है। छात्रों को नियुक्ति के बाद छह महीने की विशेष ट्रेनिंग करनी होगी। इस निर्णय से यूपी में तकरीबन पाँच लाख बीएड छात्रों के लिए नौकरी के रास्ते खुल सकेंगे। एक अप्रैल से आरटीई लागू होने पर शिक्षकों की पूर्ति के लिए प्रदेश सरकार ने एनसीटीई को विशिष्ट बीटीसी के तहत नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा पर यह रिजेक्ट हो गया था। प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री ने भी केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से मिलकर बीएड छात्रों को सीधे नियुक्त करने की छूट माँगी थी लेकिन 23 अगस्त को एनसीटीई दिल्ली ने नियुक्ति हेतु न्यूनतम योग्यता में बड़े बदलाव पर मुहर लगा दी। यह संशोधन गजट में भी प्रकाशित हो गया है। संशोधन के अनुसार 50 फीसदी अंकों के साथ स्नातक और बीएड डिग्री धारक की कक्षा एक से पाँचवीं क्लास तक के लिए नियुक्ति की जा सकेगी। यह छूट केवल 1 जनवरी 2012 तक प्रभावी रहेगी। छात्र को नियुक्ति के बाद प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में विशेष प्रशिक्षण लेना होगा। पहले छात्र को नियुक्ति के बाद छह महीने की ट्रेनिंग कराई जाती थी। ऐसे में नए संशोधन से बीएड डिग्रीधारकों को सीधे नियुक्ति का मौका मिल जाएगा(हिंदुस्तान,मेरठ,2.9.2010)।

इसी विषय पर दैनिक जागरण की रिपोर्ट भी देखिएः
"प्रदेश के लाखों बीएड डिग्री धारक अब सीधे प्राइमरी अध्यापक बन सकेंगे। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने उनकी सीधी भर्ती का रास्ता साफ कर दिया है। प्रदेश में अभी तक यह व्यवस्था थी कि जिन बीएड डिग्री धारकों को प्राइमरी अध्यापक के रूप में नियुक्त करना होता था, उन्हें पहले छह महीने का विशिष्ट बीटीसी का प्रशिक्षण करना होता था। इसके बाद ही उन्हें प्राइमरी में शिक्षक नियुक्त किया जाता था। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू होने से प्राइमरी में लाखों अध्यापकों की जरूरत है। प्रदेश में कुल डायट से प्रतिवर्ष 12 हजार प्रशिक्षित शिक्षक बीटीसी करने के बाद मिल पायेंगे। यह भी पूरे दो साल में मिलेंगे। ऐसे में अध्यापकों की कमी सालों तक भी पूरी नहीं हो पायेगी। बीएड डिग्री धारकों की प्राइमरी अध्यापक के रूप में ही विशिष्ट बीटीसी के माध्यम से नियुक्तियां बंद कर दी गयी हैं। वहीं, प्रदेश के करीब 1020 बीएड कालेजों से प्रतिवर्ष 1 लाख 17 हजार डिग्री धारक निकलते हैं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने गत 23 अगस्त को अधिसूचना जारी की है। जिसके अनुसार जिन अभ्यर्थियों ने 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीए/बीएससी और बीएड की डिग्री हासिल की है, वह कक्षा एक से लेकर पांच में नियुक्ति के लिए एक जनवरी-2012 तक पात्र होंगे।"

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