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22 सितंबर 2010

अब नोकिया फोन पर इग्नू का इंग्लिश कोर्स

दूरस्थ शिक्षा में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की अपनी पहल के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने मंगलवार को नोकिया फोन के "ओवी लाइफ टूल्स" के जरिए इंग्लिश का एक सर्टिफिकेट कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।

इग्नू के उपाध्यक्ष वी.एन. राजशेखरन पिल्लई ने संवाददाताओं से कहा, "शुरूआत में हम महाराष्ट्र के छह जिलों में यह कार्यक्रम शुरू करेंगे। छह महीने बाद लोगों की इसके लिए प्रतिक्रिया जानने के बाद हम राष्ट्रीय स्तर पर यह शुरूआत करेंगे।" इग्नू ने इस कार्यक्रम को उपलब्ध कराने के लिए नोकिया के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है। पिल्लई ने कहा, "हम इस कार्यक्रम के लिए नोकिया के साथ एक विशेष समझौता कर रहे हैं। ब़डे पैमाने पर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए किया गया यह अपनी तरह का पहला सहयोगात्मक समझौता है।" उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा की उन्नति और प्रचार-प्रसार के लिए अन्य कंपनियों के साथ भी ऎसे समझौते किए जाएंगे। इंग्लिश में छह महीने की अवधि का यह सर्टिफिकेट कार्यक्रम अगले साल जनवरी में शुरू होगा। इसके तीन अलग स्तर होंगे। इनमें रोजमर्रा के जीवन में अंग्रेजी, शिक्षा में अंग्रेजी और कार्यस्थल पर अंग्रेजी शामिल है। इस कोर्स में 1,900 रूपये का खर्च आएगा। नोकिया इंडिया के प्रबंध निदेशक डी. शिवकुमार का कहना है कि उनकी कंपनी ने देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार की एक नई पहल की है। नोकिया ने जून 2009 में "ओवी लाइफ टूल्स" सेवा जारी की थी। इसके तहत कृषि, शिक्षा और मनोरंजन सेवाएं दी जाती हैं। इस पर अंग्रेजी के अलावा हिंदी, मलयालम, कन्ऩड, तमिल, तेलुगू, पंजाबी, मराठी, बांग्ला, गुजराती और उड़िया भाषा में सेवाएं उपलब्ध रहती हैं(खास खबर डॉटकॉम,21.9.2010)।

नई दुनिया की रिपोर्ट कहती है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में छात्रों को कोर्स के बारे में अपडेट करने के लिए निजी मोबाइल कंपनी नोकिया ने मंगलवार को करार किया। इसके तहत कंपनी अपने एक खास सेट ओवी लाइफ टूल्स पर छात्रों को कोर्स और उसमें चलने वाली गतिविधियों के बारे में निरंतर जानकारी प्रदान करेगा। कोर्स के पाठ्यक्रम से लेकर परीक्षा की तैयारी तक इसमें जानकारी मुहैया कराई जाएगी। समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कंपनी के एमडी डी शिवकुमार और कुलपति प्रो वीएन राजशेखरन पिल्लई ने किया। कंपनी आगामी जनवरी से जून तक महाराष्ट्र के कुछ जिलों में इसे प्रायोगिक तौर पर चलाएगा। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो आनेवाले समय में अन्य जगहों पर भी इसे अमल में लाया जाएगा। कंपनी छात्रों को सूचना देने और अपडेट करने के लिए कोई फीस या शुल्क नहीं लेगी।

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