चीन को हर क्षेत्र में टक्कर देने के लिए भारत अब अपने सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थाओं की मदद लेगा। ड्रैगन बढ़ती व्यापारिक, सामरिक और तकनीकी ताकतों से मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए भारत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे संस्थानों की मदद से अध्ययन कर नई रणनीति विकसित की जाएगी।
दुश्मन पर आईटी के जरिए नजर रखने का प्रस्ताव देने वाला संस्थान आईआईटी मद्रास इसके लिए लिए एक केंद्र खोलेगा जिसमें चीन से जुड़े हर तथ्य और सामाजिक बदलावों को करीब से अध्ययन किया जाएगा। इसके तहत चीन में माओ तुंग की क्र्रांति, डेंग जियांपिंग के सुधारवादी आंदोलन और आज की कूटनीति का अध्ययन किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत देश की सामरिक रणनीति और दक्षता को विकसित करने के लिए विदेशों में भी स्टडी सेंटर खेले जाएंगे।
योजना के तहत हर आईआईटी एक देश की रणनीति पर फोकस करेगा। विदेशों में खेले जाने वाले स्टडी सेंटर रणनीतिक और सामरिक समझौतों के अवसर पर सरकार को अपनी सलह दे सकते हैं। इन स्टडी सेंटर में पूर्व विदेश सचिवों और राजदूतों के एडवायजरी बोर्ड में रखा जाएगा।
उल्ल्ेखनीय है कि अमरीका और ब्रिटेन जैसे देश अपनी यूनिवर्सिटी में भारत और चीन की उभरती सामरिक और आर्थिक ताकतों का अध्ययन करने और उसके खिलाफ योजना बनाने के लिए ऎसे स्टडी सेंटर खोल चुके हैं। भारत को भी देर से ही सही लेकिन चीन की हरकतों पर नजर रखने के लिए इस तरह की योजना की जरूरत महसूस हुई है। योजना को शुरू करने वाले आईआईटी मद्रास के अनुसार चीन भू- राजनीतिक रूप से खास मायने रखता है। भारत चीन आज वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के दौर में हैं और इस तरह की नीतियों को लागू करके हम चीन को समझने की कोशिश करेंगे(राजस्थान पत्रिका,16.9.2010 में मुंबई की ख़बर)।
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