राज्य के मेडिकल कॉलेजों में आदिवासी (एसटी) छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित 39 में से 19 सीटों पर अब दूसरे वर्ग के छात्र-छात्राओं का एडमिशन लिया जाएगा।
झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद 25 सितंबर से इन सीटों पर नामांकन के लिए काउंसलिंग प्रारंभ करेगा। यह जानकारी पर्षद के परीक्षा नियंत्रक एल खियांग्ते ने दी। खियांग्ते ने कहा कि एमसीआई ने आरक्षित श्रेणी के छात्र-छात्राओं के नामांकन के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स 40 प्रतिशत निर्धारित किया है। इस वर्ष मात्र 19 एसटी छात्र-छात्राओं ने क्वालिफाइंग मार्क्स प्राप्त किया है। कार्मिक विभाग के संकल्प के आधार पर एसटी की रिक्त सीटों को एससी में समायोजित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी इस संबंध में पत्र आया है कि एमसीआई के निर्देशानुसार 40 प्रतिशत से काम मार्क्स वाले छात्र-छात्राओं को एडमिशन नहीं लिया जाए। मेडिकल कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया हर हाल में 30 सितंबर तक पूरी करनी है, ऐसे में नामांकन प्रक्रिया इससे पहले पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।
32 छात्र-छात्राओं के भविष्य पर लटक रही तलवार : पिछले वर्ष 32 आदिवासी छात्र—छात्राओं का नामांकन 40 फीसदी से कम मार्क्स पर किया गया था। इसपर एमसीआई ने सभी का नामांकन रद्द करने को कहा है। हालांकि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और राज्यपाल एमओएच फारूक की ओर से केंद्र सरकार तथा एमसीआई को पत्र लिखा गया कि छात्रों का नामांकन रद्द नहीं किया जाए।
एमसीआई ने अभी इसपर कोई फैसला नहीं लिया है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा लिए जाने पर एमसीआई ने कहा है कि राज्य सरकार अपने रिस्क पर छात्रों की परीक्षा ले। आदिवासी वर्ग के छात्र-छात्राओं की सीटें दूसरे वर्ग को दिए जाने का टीएमए विरोध कर रहा है।
आदिवासी सीटें दूसरे को दिए जाने का विरोध होगा। रजनीश मिश्रा के मामले में भी यह जिक्र है कि एसटी की सीटें दूसरे वर्ग को नहीं दी जा सकीं।
केंद्र सरकार ने भी आदेश निकाला है कि सीटें समायोजित करने से पहले उस वर्ग के लिए फिर से परीक्षा आयोजित की जाए, जो कि झारखंड में नहीं किया गया।
नीतिश एक्का, टीएमए(दैनिक भास्कर,रांची,22.9.2010)
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