सीबीएसई ने सभी कक्षाओं में सतत एवं समग्र मूल्यांकन (सीसीई) तो लागू कर दिया है लेकिन स्कूलों द्वारा किए जा रहे मूल्यांकन ने छात्रों का तनाव बढ़ा दिया है। यही नहीं इससे अभिभावक भी थोड़ा परेशान हो गए हैं। बोर्ड ने सीसीई के संबंध में अभिभावकों, छात्रों, शिक्षकों और प्रचार्यों से जानकारी ली है। इसमें बच्चों के ऊपर थोड़े दबाव की बात सामने आई है।
सीसीई को छात्रों के तनाव को कम करने के लिए लागू किया गया लेकिन स्कूलों में करवाए जा रहे प्रोजेक्ट और अतिरिक्त टेस्ट ने छात्रों का तनाव बढ़ा दिया है। लोगों से बातचीत में बोर्ड ने पाया कि स्कूल छात्रों के समग्र मूल्यांकन ने तनाव को बढ़ा दिया है।
सभी से ली गई अनौपचारिक जानकारी में पाया गया कि कई स्कूल छात्रों से खूब प्रोजेक्ट कार्य और होमवर्क करवा रहे हैं। यही नहीं यह प्रोजेक्ट बच्चों को घर करने के लिए दिए जा रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के साथ लग कर सारा काम खुद ही करवाना पड़ता है। इसके साथ ही स्कूलों में पीटीए की बैठकें भी नहीं होती है। इन सब को देखते हुए बोर्ड ने स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बच्चों से सभी तरह के प्रोजेक्ट कार्य स्कूल के समय में शिक्षकों की निगरानी में करवाए जाएं। इस तरह के कार्यों को बच्चों को समूह में दिए जाएं जिससे कि बच्चों को काम खुद बच्चे ही करें। घर के लिए दिए जाने पर प्रोजेक्ट को अभिभावक या भाई-बहन करते हैं। सीबीएसई ने स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बच्चों के संपूर्ण विकास की तरफ शिक्षक ध्यान दें, ग्रेड देने के लिए छात्रों पर काम का बोझ न बढ़ाएं। शिक्षक कक्षा में विषयों को रोचक ढंग से पढ़ाएं। वहीं शिक्षकों का कहना है कि प्रोजेक्ट कार्य करने से बच्चों का विकास होगा। वे चीजों को समझेंगे और कुछ समय बाद बच्चों को इसमें मजा आएगा। सीबीएसई ने एक बार फिर स्कूलों को स्पष्ट किया है कि हर सप्ताह छात्रों का औपचारिक टेस्ट, बहुत सारा होमवर्क, बच्चों के व्यवहार का आकलन आदि सीसीई का हिस्सा नहीं है। स्कूल दोबारा सीसीई से संबंधित जानकारी को देखें और उसी के अनुरूप छात्रों का मूल्यांकन करें(नई दुनिया,दिल्ली,13.9.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।