चार सितम्बर को कैबिनेट के फैसले के बाद भी रजिस्ट्री दफ्तर में करीब 30 साल से काम कर रहे दैनिक वेतनभोगियों की निराशा दूर नहीं हो सकी है। ऐसे कर्मियों की संख्या 400 से ऊपर है। दैनिक वेतनभोगी सेवा नियमावली के पेंच के चलते कैबिनेट के निर्णय की खुशियाँ इनसे दो हाथ दूर हो गई हैं। दैनिक वेतनभोगियों को आशंका है कि सेवा नियमवाली में संशोधन किए बगैर स्थायी कर्मचारी का तमगा नहीं पहन सकेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से नियमावली में संशोधन की गुजारिश की है।रजिस्ट्री दफ्तर में 400 से अधिक दैनिक वेतनभोगी पिछले 30 साल से सहायक के रूप में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि सरकार ने वर्ष 1998 में दैनिक वेतनभोगी सेवा नियमावली बनाई। इसमें सरकार ने दैनिक वेतनभोगी के लिए नौ जुलाई 1998 को ‘निरंतर’ कार्यरत रहने की शर्त लगा रखी है। ऐसे में 29 जून 1991 से पहले काम कर रहे रजिस्ट्री दफ्तर के दैनिक वेतनभोगियों के स्थायीकरण में दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। दैनिक वेतनकर्मियों का कहना है कि ‘निरंतर’ शब्द को सेवा नियमावली को हटाने का आदेश मुख्यमंत्री ही दे सकती हैं। इस शब्द की बाध्यता हटने के बाद ही दैनिक वेतनकर्मियों को स्थाई का तमगा हासिल हो सकेगा(हिंदुस्तान,लखनऊ,6.9.2010)।
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