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16 सितंबर 2010

राजस्थानः 'स्कूल या बोर्ड' को लेकर उलझन

दसवीं की परीक्षा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या स्कूल से दें, यह सवाल विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी में डाले हुए है। स्कूल और बोर्ड कार्यालय में पूछताछ करने वालों की बढती तादाद कुछ यही बयां कर रही है। बोर्ड ने सतत मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत सत्र 2010-11 में दसवीं में परीक्षा के लिए दो विकल्प दिए हैं।


इसके तहत सेमेस्टर पद्धति से परीक्षाएं होनी हैं। ग्यारहवीं और बारहवीं में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में ही रहने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा विकल्प (एसए-1) स्कूल स्तर पर होंगे। प्रश्न पत्र और अंक विभाजन योजना बोर्ड भेजेगा। विकल्प (एसए-2) के तहत दसवीं के बाद अन्यत्र बोर्ड में जाने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा सीबीएसई कराएगा। अंक विभाजन योजनानुसार बोर्ड कॉपियों की जांच कराएगा। यही प्रक्रिया दसवीं स्तर भी लागू होगी। लेकिन अभिभावक स्कूल और बोर्ड के जरिए परीक्षा का विकल्प चुनने, परिणाम और अन्यत्र दाखिलों में होने वाली समस्याओं को लेकर परेशान हैं।
अभिभावकों की समस्याएं

- दसवीं के बाद दूसरे शहरों में स्कूलों में दाखिले मिलेंगे या नहीं
- ग्यारहवीं में सीबीएसई को जारी रखा जा सकेगा या नहीं
- स्कूली स्तर और बोर्ड से दसवीं परीक्षा देने में क्या फर्क पडेगा
- मूल्यांकन में पारदर्शिता किस तरह रहेगी
- स्कूलों पर बोर्ड किस तरह निगाह रखेगा

स्कूल भी बोर्ड की तरफ

मिशनरी, पब्लिक और अन्य स्कूलों के प्राचार्य, संचालक भी बोर्ड में पूछताछ में जुटे हुए हैं। हालांकि उन्होंने विद्यार्थियों और उनके परिजनों को दसवीं परीक्षा का विकल्प चयन के लिए पत्र भिजवाए हैं। अभिभावकों से मिली-जुली समस्याओं की तरह स्कूल भी बोर्ड के सम्पर्क में हैं।
इनका कहना है

दोनों ही विकल्प चुनने पर अंकतालिका-प्रमाण पत्र बोर्ड ही जारी करेगा। मूल्यांकन की दोनों प्रक्रियाएं समान हैं। कहीं भी प्रवेश लेने में दिक्कतें नहीं होंगी। अभिभावकों और स्कूलों को पूरी पद्धति बताई जा रही है।
पी.आई.साबू, संयुक्त सचिव सीबीएसई अजमेर जोन(राजस्थान पत्रिका,अजमेर,16.9.2010)

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