डीयू के वाइस चांसलर को अपने सख्त फैसलों पर कॉलेजों के प्रिंसिपलों का समर्थन मिला है। कॉलेजों के प्रिंसिपलों की मंगलवार को हुई जनरल बॉडी मीटिंग में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि स्टूडेंट्स की क्लासेज सुनिश्चित करने के लिए वीसी ने जो फैसले लिए हैं, उन्हें लागू किया जाएगा। वीसी ने टीचर्स के लिए अटेंडेंस सिस्टम लागू कर दिया है, साथ ही साइंस के टीचर्स से सेमेस्टर से पढ़ाने की अंडरटेकिंग लेने का आदेश भी जारी किया है। प्रिंसिपलों की मीटिंग में यह तय किया गया कि टीचर्स की अटेंडेंस के लिए रजिस्टर बनाए जाएंगे, साथ ही उनको अंडरटेकिंग देने को भी कहा जाएगा।
मीटिंग में काफी कॉलेजों के प्रिंसिपलों ने भागीदारी की। इसमें नॉर्थ कैंपस स्थित खालसा कॉलेज, गार्गी कॉलेज, मिरांडा हाउस, दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज, बी. आर. आंबेडकर कॉलेज, आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, दयाल सिंह ईवनिंग कॉलेज, राजधानी कॉलेज, शिवाजी कॉलेज, रामलाल आनंद कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, देशबंधु कॉलेज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज समेत दूसरे कॉलेजों के प्रिंसिपल भी मौजूद थे। डीयू प्रिंसिपल असोसिएशन के प्रेजिडेंट डॉ. सुरेश कुमार गर्ग ने मीटिंग के बारे में बताया कि वीसी के हालिया आदेशों को लागू करने की बाबत सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रिंसिपलों ने स्टूडेंट्स की पढ़ाई को लेकर हो रहे नुकसान की बात भी मीटिंग में उठाई।
जानकारी के मुताबिक मीटिंग 3 घंटे से भी अधिक समय तक चली। मीटिंग में शामिल हुए नॉर्थ कैंपस के एक कॉलेज के प्रिंसिपल का कहना है कि वाइस चांसलर ने जो आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक नो वर्क नो पे, अटेंडेंस व अंडरटेकिंग लेने की जिम्मेदारी कॉलेज प्रिंसिपल पर डाली गई है।
अब अगर कॉलेज प्रिंसिपल बिना वेरिफाई किए टीचर्स की सैलरी जारी करवा देते हैं तो आने वाले समय में प्रिंसिपल से भी सवाल पूछे जाएंगे। दूसरे कॉलेजों के प्रिंसिपलों का भी मानना है कि वीसी के आदेश को लागू करना ही पड़ेगा। कुछ प्रिंसिपल कहते हैं कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई का अब बहुत नुकसान हो चुका है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो स्टूडेंट्स पास भी नहीं हो पाएंगे। अब स्टूडेंट्स की क्लासेज हर हाल में होनी चाहिए। वीसी ने हाल ही में जो आदेश जारी किए हैं, उनमें नो वर्क नो पे, टीचर्स के लिए हाजिरी सिस्टम और साइंस के टीचर्स से अंडरटेकिंग लेना शामिल हैं(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,29.9.2010)।
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