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22 सितंबर 2010

पंजाबःज्योतिषी बने डॉक्टर-प्रोफेसर

नाम के आगे डॉक्टर या प्रोफेसर लिखना है तो इसके लिए पीएचडी करना या कालेजों में पढ़ाते पढ़ाते जिंदगी घिसने की जरूरत नहीं है। आप बस एक ज्योतिष केंद्र खोल दीजिए। बोर्ड पर डिग्री लिखवाना आपकी सोच के विस्तार पर निर्भर करेगा।

डिप्लोमा हैं तो अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’, मास्टर डिप्लोमा हैं तो ‘एमडी’ और कोचिंग खोल रखी है तो ‘प्रोफेसर’ लिख दीजिए। शायद ही आपसे कोई पूछे। डॉक्टर और प्रोफसर लिखने के बाद दुकानदारी दिन दुगनी रात चौगुनी चमकने लगेगी।

राज्य भर में सैकड़ों ज्योतिषी इस नुसखे को आजमा रहे हैं। नाम के आगे डॉक्टर, प्रोफेसर और गोल्ड मेडलिस्ट जैसे शब्दों का प्रयोग कर ज्योतिष में विश्वास रखने वालों को भ्रम में डाल रहे हैं। पूरे खेल को जानने के लिए दैनिक भास्कर टीम ने इसकी पड़ताल की।

कैसे लिख रहे हैं डॉक्टर या प्रोफेसर

ज्योतिष को अभी तक कोई मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी स्वतंत्र विषय के तौर पर नहीं पढ़ा रही है। हाल ही में यूजीसी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी को इसकी मान्यता दी है। ऐसे में इस विषय में पीएचडी और प्रोफेसर की उपाधियां तो बहुत दूर की बात हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई कि ज्योतिषी अपनी शैक्षणिक डिग्रियों को अपनी मर्जी के अनुसार पेश कर देते हैं।

किसी संगठन के मंच से ज्योतिषाचार्य के रूप में सम्मानित होने वाले खुद को प्रोफेसर लिखना शुरू कर देते हैं जबकि कुछ लोग तो मास्टर डिप्लोमा इन मेडिकल एस्ट्रोलॉजी के नाम पर अपने आप को एमडी डॉक्टर तक बता रहे हैं। ज्योतिषियों की कुछ संस्थाएं भी अपने सदस्यों को रुपये लेकर डॉक्टर व प्रोफेसर की मानद उपाधियां और गोल्ड मेडल बांटती हैं।

रुपये देकर डाक्टर की उपाधि

अंबाला की एक ज्योतिष संस्था के महासचिव किशोर जैन का दावा है कि ज्योतिष सम्मेलन के दौरान उनके पास कई बार लोग रुपये लेकर आते हैं और गोल्ड मेडल व डॉक्टर की मानद उपाधि की मांग करते हैं। उनके अनुसार ज्योतिष से जुड़े लोगों ने ऐसी कई संस्थाएं बनाई हुई हैं जो कि रुपये लेकर गोल्ड मेडल दे देते हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले साल लुधियाना में आयोजित ज्योतिष सम्मेलन के दौरान कुछ ज्योतिषी आए और उनसे गोल्डमेडल की मांग की। ऐसे लोग सिर्फ ज्योतिष की दुकानदारी चमकाने के लिए यह काम करते हैं। नियमानुसार कोई भी व्यक्ति मानद उपाधि को अपने नाम के साथ बोर्ड पर नहीं प्रदर्शित कर सकता।

भ्रम पैदा करने के लिए लिखते हैं प्रोफेसर और डॉक्टर

आर्यव्रत ज्योतिर्विज्ञान संस्था के महासचिव प्रदीप ढल्ल ने बताया कि लुधियाना के अधिकतर ज्योतिषियों में पैसा कमाने की होड़ है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज्योतिषियों ने यह नया हथकंडा अपनाना शुरू किया है। उन्होंने अपने नाम के आगे डॉक्टर, प्रोफेसर, गुरु, आचार्य और सम्राट जैसे शब्दों धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं।

इनके पास कोई अधिकृत डिग्रियां नहीं हैं। लोगों को भ्रम में डालने के लिए वो नाम के आगे सिर्फ फर्जी उपाधियां ही नहीं, बल्कि दुनियांभर के आडंबर भी कर रहे हैं। जो अधिकतर ज्योतिष कैंपों में रुपये लेकर बांटी जा रही हैं।

कौन लगा सकता है नाम के आगे प्रोफेसर और डाक्टर

गवर्नमेंट कालेज फार ब्वॉयज के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मुकेश अरोड़ा का कहना है आचार्य और प्रोफेसर में बहुत अंतर है। कालेजों में पढ़ाने वाले सभी अध्यापक भी प्रोफेसर नहीं हैं। प्रोफेसर बनने के लिए लोगों को कालेजों में जिंदगी घिसनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि सरकारी कालेज में खुद हिंदी का विभागाध्यक्ष है लेकिन वो भी अभी तक प्रोफेसर रैंक में नहीं हैं।

इसी तरह आईएमए के प्रधान डा. नरोत्तम दीवान ने बताया कि मेडिकल के फील्ड में काम कर रहे वो डॉक्टर ही अपने नाम के आगे डॉक्टर लिख सकते हैं जिन्होंने स्पेशलाइजेशन की हो। इसके अलावा विभिन्न विषयों में पीएचडी करने वाले लोग भी अपने नाम के आगे डाक्टर लगा सकते हैं।

वहीं इंडियन बोर्ड आफ अल्टरनेटिव मेडिसन कोलकाता के प्रतिनिधि सुशील ने बताया कि एमडीएएम करने वाले अपने नाम के आगे डाक्टर नहीं लिख सकते हैं क्योंकि यह डिग्री कोर्स नहीं बल्कि मास्टर डिप्लोमा कोर्स है(राजेश भट्ट/आरके मौ�,दैनिक भास्कर,लुधियाना,22.9.2010)

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