गणित की उलझन में घंटों फंसे रहने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर है। बात चाहे जियोमेट्री की हो या फिर एलजेब्रा की अब उन्हें घंटों सिर नहीं खापना होगा। जी हां, गणित विषय को स्टूडेंट फ्रेंडली बनाने के लिए एनसीईआरटी ने अब सीडी-डीवीडी का सहारा लिया है।
बड़ी परेशानियों का चुटकियों में समाधान करने के लिए मल्टी मीडिया पैकेज का इंतजाम किया है जिसके जरिए आने वाले दिनों में शिक्षकों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी गणित की उलझन आसान होगी।
एनसीईआरटी के स्वर्ण जयंती वर्ष के उद्घाटन के मौके पर बुधवार को केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इस नई पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। सिब्बल ने इस मौके पर एनसीईआरटी से अनुरोध किया कि वह सतत एवं समग्र मूल्यांकन (सीसीई) प्रणाली के तहत ऐसा सलाहकार का मसौदा तैयार करें जिससे कि स्कूलों में पढ़ाए जा रहे इस सिस्टम में विकलांग श्रेणी के छात्रों को भी सहज तौर पर शामिल किया जा सके।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के मुताबिक शिक्षा के स्तर की गुणवत्ता बनाए रखने जरूरत है। समय की मांग को समझते हुए उन्होंने माध्यमिक स्तर पर ही पाठ्यक्रम को विभिन्न व्यवसायों से युक्त बनाए जाने की बात कही। साथ ही समस्या के समाधान के कौशल के विकास को बच्चों में विकसित करने पर बल दिया।
एनसीईआरटी के सीआईईटी विभाग ने राष्ट्रीय करिकुलम फ्रेमवर्क-2005 की सिफारिशों के आधार पर छात्रों व शिक्षकों को मदद मुहैया कराने के लिए यह सीडी व डीवीडी तैयार की हैं। मल्टीमीडिया पैकेज के अलावा बच्चों के लिए भारतीय कला पर मल्टीमीडिया सीडी रोम भी तैयार किया गया है। जिसमें भारत के 5 हजार साल की भारतीय कला को समेटा गया है।
एक तरह से यह सीडी बच्चों को पुरातन धरोहरों से परिचित कराएगी। इसके साथ ही नृत्य व योगासन से संबंधित डीवीडी भी तैयार की गई हैं जो कि स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा में अहम योगदान देगी। मानव संस्धान विकास मंत्री ने एनसीईआरटी को 50 वर्ष में प्रवेश करने की बधाई देते हुए कहा कि अब वह समय आ गया है जब हमें हमें क्या और कैसी शिक्षा देनी है इस बात का मूल्यांकन करना होगा(दैनिक भास्कर,दिल्ली,2.9.2010)।
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