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27 सितंबर 2010

एमबीए बनाम चार्टर्ड एकाउंटेंट

एकाउंटेंसी, ऑडिटिंग, कराधान जांच और कंसलटेंसी जैसे कुछ विशेष विभाग हैं जो आपको आमतौर पर हर कार्यालय में देखने को मिल जाएंगे। सरकारी ऑफिस हो या नीजि इन विभागों में काम करने वाले लोगों के रुतबे से हर कोई वाकिफ है। अब जब स्टेट्स भी अच्छा और वेतन भी तो छात्र इस क्षेत्र में जाने से कतराते क्यों हैं? हाल में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार कॉमर्स इंडस्ट्री में उच्च शिक्षा के दो पाठ्यक्रमों को लेकर छात्रों के बीच हमेशा कसमकश रहती है। ये दो पाठ्यक्रम हैं- एमबीए और सीए।

सीए की पढ़ाई का रुझान कम

दिल्ली स्थित अकादमी ऑफ कॉमर्स (एओसी) से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि चार्टर्ड एकाउंटेंसी (सीए) की पढ़ाई को लेकर छात्रों के मन में कहीं न कहीं एक भय बना रहता है कि ये पाठ्यक्रम बहुत मुश्किल है। यह भय उन लोगों द्वारा बनाया हुआ होता है जो काफी समय पहले यह कोर्स कर चुके होते हैं या फिर उन लोगों द्वारा जिन्होंने सीए बनने की कोशिश तो की परंतु बन नहीं पाए। कुछ वर्ष पूर्व हमारे समाज के एक बड़े वर्ग में माता-पिता अपने बच्चे की उच्च शिक्षा में ४ वर्ष नहीं लगाना चाहते थे। आम धारणा यह बनी रही के छात्र स्नातक हो गया, बस अब कमाने लग जाए। ऐसे में उच्च शिक्षा के नाम पर एमबीए नई दिशा निकलकर आई जिसने छात्रों को बेहद प्रभावित किया। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो आधी से भी कम अवधि की पढ़ाई! बस फिर क्या, गली-गली बी इंस्टिट्यूट तथा यूनिवर्सिटी खुलने लगीं। आज हर ४ में से ३ छात्र आपको एमबीए करते नजर आ जाएंगे। जबकि सीए की बात की जाए तो भारत में चार्टर्ड एकाउंटेट का मात्र एक संस्थान है जो किआवश्यकतानुसार प्रशिक्षिण आयोजित करता है और परिणाम घोषित करता है। भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंट ऑफ इंडिया) एक ऐसा संस्थान है जहां आपको शून्य प्रतिशत बेरोजगारी देखने को मिलेगी।

तुलनात्मक अध्ययन

अकादमी ऑफ कॉमर्स के निदेशक के.एम. गुप्ता के अनुसार, "सीए शून्य निवेश वाला पाठ्यक्रम है जबकि एमबीए कोर्स की फीस आज आसमान छूती नजर आ रही है। ऐसे भी कॉलेज और यूनिवर्सिटी हैं जहां एमबीए की फीस ८ लाख से २० लाख रुपए तक है। इसकी तुलना में सीए की पढ़ाई पर कुछ खास खर्चा नहीं है।"

१. कोई कंपनी एमबीए के बिना तो चलाई जा सकती है परंतु सीए के बिना नहीं।

२. प्रशिक्षु सीए को लगभग ४००० रुपए प्रति माह वजीफा (ट्रेनी स्टीपेंड) मिलता है जो तीन वर्ष में लगभग १.४ लाख रुपए होता। इतनी ही फीस सीए की बैठती है।

३. एक सीए का वेतन भी एमबीए की तुलना में कहीं अधिक होता है। आईसीएआई के कैंपस प्लेसमेंट में ७ लाख रुपए सालाना का वेतन बहुत आराम से मिलता है।

४. यदि सामाजिक प्रतिष्ठा देखी जाए तो नाम से पहले सीए लिखा जा सकता है, एमबीए नहीं।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

वर्ष २००८ के बाद से भारत में चार्टर्ड एकाउंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है। विकासशील अर्थव्यवस्था में इस पाठ्यक्रम की काफी आवश्यकता है। के.एम. गुप्ता का मानना है, "आज भारत में किसी अन्य पाठ्यक्रम के योग्य पेशवरों की अपेक्षा सीए का महत्व बहुत ऊंचा हो गया है। वित्त और लेखा आउटसोर्सिंग की यदि बात की जाए तो केपीओ और बीपीओ के बढ़ते बाजार में चार्टर्ड एकाउंट के वारे-न्यारे होने हैं।"

फिलहाल भारत में प्रतिवर्ष ९ से १० हजार छात्र सीए की परीक्षाएं उत्तीर्ण करते हैं। एक आकलन है कि वर्ष २०१० के अंत तक देश में सीए की मांग ५० हजार हो जाएगी। यह कोर्स करने के बाद आप किसी भी प्रख्यात कंपनी में बतौर फाइनेंस मैनेजर, फाइनेंसियल कंट्रोलर, फाइनेंसियल एडवाइजर या फाइनेंस डायरेक्टर की हैसियत से काम कर सकते हैं। एकाउंटेंसी, ऑडिटिंग, कॉस्ट एकाउंटेंसी, टैक्ससेशन, इन्वेस्टीगेशन तथा कंसलटेंसी में भी आगे अवसर हैं(दीपिका शर्मा,नई दुनिया,दिल्ली,27.9.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. इस जानकारी के लिए बहुत-२ धन्यवाद आपका ,मैं भी सी.ए कर रहा हूँ

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