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06 सितंबर 2010

हिमाचलःकिशोरों के लिए होगी स्कूलों में काउंसलिंग

प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने किशोरावस्था से जुड़ी शिक्षा को बोर्ड के विषय में शामिल कर लिया है। प्रदेश के छह अध्यापक हाल ही में नेशनल यूथ सेंटर दिल्ली से टिप्स लेकर लौटे हैं। स्टेट काउंसलिंग ऑफ एजूकेशन रिचर्स एंड ट्रेनिंग ने प्रदेश के 225 सीनियर सेकंडरी स्कूलों के किशोरों को जागरूक करने के लिए कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करवाने के लिए राशि जारी कर दी है।

मानव जीवन की सबसे अहम अवस्था किशोरावस्था होती है। यह समय अति संवेदनशील होता है, क्योंकि इस दौरान किशोर शारीरिक, मानसिक एवं व्यावहारिक परिवर्तनों से गुजरतें हैं। उन्हें मागदर्शन की जरूरत होती है और वे बिना मार्गदर्शन के भटक सकते हैं।

किशोरों को शिक्षित करने के लिए परिजनों की भूमिका अहम होगी। किशोरों के साथ मित्रवत व्यवहार, उनकी क्रियाकलापों में रुचि, उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढकर अभिभावक उनकी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा स्कूल स्तर पर किशोरावस्था की सीख लेना लाजिमी है। झारखंड ने उड़ान कार्यक्रम से इसकी शुरूआत कर दी है।

हालांकि किशोरों की शिक्षा से संबंधित रिफ्रेशर कोर्स हर साल चलते हैं। लेकिन किशोरावस्था से जुड़ी शिक्षा को बोर्ड के सलेबस में जोड़ने के लिए बोर्ड को कह दिया गया है।
मीरा वालिया, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एससीईआरटी(दैनिक भास्कर,मंडी,6.9.2010)।

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