किसी परीक्षा में यदि जितने प्रश्न हल करने हों उतने उत्तरों की जगह ही नहीं हो तो अभ्यर्थियों का क्या हाल होगा। रविवार को कर्मचारी चयन आयोग की ओर से आयोजित आशुलिपिक परीक्षा 2010 में ऎसा ही कुछ हुआ। प्रात: 10 से 12 बजे तक आयोजित परीक्षा में 214 बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे गए लेकिन उत्तर के लिए दी गई ओएमआर शीट में मात्र 200 तक की संख्या थी। परीक्षा के स्थानीय संयोजक ने इसे आयोग की गलती बताया है। जयपुर में 12 परीक्षा केंद्रों पर 2558 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी और 1805 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
ये है मामला: परीक्षा में प्रश्न संख्या 51 से 64 तक कुल 14 प्रश्न केवल दृष्टि बाघित अभ्यर्थियों को करने थे क्योंकि आकृति से संबंघित 14 प्रश्न ये अभ्यर्थी नहीं कर सकते थे। अब अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को अलग-अलग निर्देश दिए गए। कहीं अभ्यर्थियों से कहा गया कि वे ओएमआर शीट पर 201 से 214 तक अंक लिखकर ए,बी,सी,डी के गोले बनाकर उनमें उत्तर लिखें तो कुछ सेंटरों पर निर्देश दिए गए कि वे प्रश्न 64 का उत्तर ओमएमआर शीट में 51 के सामने व आगे इसी क्रम में लिखें।
जनता गल्र्स स्कूल मानसरोवर पर एक परीक्षार्थी ने बताया कि उन्हें निर्देश मिले कि प्रश्न 64 पर 51 का उत्तर लिखें व आगे इसी क्रम में उत्तर लिखें जबकि महारानी कॉलेज व ढहर के बालाजी सेंटर के अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट पर 201 से 214 तक प्रश्नों के उत्तर कोष्ठ हाथ से ही बनाकर भरने के लिए कहा गया।
आयोग की गलती है
यह आयोग की गलती है हम तो परीक्षा के आयोजन में सहयोग करते हैं। जानकारी मिलते ही आयोग से निर्देश लेकर केंद्रों पर जानकारी दे दी थी कि ओएमआर शीट में प्रश्न 201 से 214 तक के उत्तर कोष्ठ हाथ से ही लिखकर उत्तर भरे जाएं।
सी.एम.शर्मा, सहायक शासन सचिव, व परीक्षा समन्वयक(राजस्थान पत्रिका,जयपुर,27.9.2010)
अति सुन्दर और ज्ञानवर्धक जानकारी ........ आभार
जवाब देंहटाएंजाने काशी के बारे में और अपने विचार दे :-
काशी - हिन्दू तीर्थ या गहरी आस्था....
अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये