गोरखपुर विश्वविद्यालय में वर्ष 2007 में हुई स्क्रूटनी में धांधली की जांच दूसरी कमेटी ने शुरू कर दी है। गुरुवार को कमेटी की बैठक हुई। बैठक के बाद कमेटी के अध्यक्ष प्रो. अरविन्द कुमार मिश्र ने कुलसचिव एएम अंसारी से जांच प्रक्रिया पूरी करने के लिए जरूरी अभिलेख मुहैया कराने की मांग की। कुलसचिव ने कमेटी को यथा शीघ्र ही जरूरी अभिलेख मुहैया कराने लिए परीक्षा नियंत्रक को निर्देशित किया।
सूत्रों के अनुसार यह निर्देश महज रस्म अदायगी है। दरअसल उस समय के दस्तावेज ही गायब है। पहली कमेटी की जांच इसीलिए पूरी नहीं हो सकी। दूसरी कमेटी भी करीब तीन साल भर पूर्व गठित हुई। दो बार इसकी बैठक भी हो चुकी। पर जांच के लिए जरूरी दस्तावेज उसे अभी तक नही मुहैया कराये गये।
मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2007 की स्क्रूटनी में भारी पैमाने पर हुई धांधली की शिकायत पूर्व एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कुलाधिपति और शासन से की। कुलाधिपति और शासन के निर्देश पर पूर्व कुलपति प्रो. एनएल मलिक ने प्रो. आरएन सिंह, प्रो. योगेश कुमार सिंह और विशेश्वर प्रसाद की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित किया। जांच कमेटी ने आवश्यक अभिलेख मांगा लेकिन लिखित रूप से उसे जवाब मिला कि अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। लिहाजा कमेटी जांच प्रक्रिया पूरी किये भंग हो गयी। प्रो. मलिक ने जनवरी 2007 में विधि विभाग के अधिष्ठाता प्रो. अरविन्द कुमार मिश्र की अध्यक्षता में दूसरी कमेटी गठित की, जिसमें प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी और प्रो. ए.ए. अंसारी गणित विभाग भी शामिल हैं। फिलहाल इस कमेटी को भी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अभी तक अभिलेखों का इंतजार है(दैनिक जागरण संवाददाता,15.10.2010)।
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