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15 अक्टूबर 2010

मेरठःगुस्साये बीएड अभ्यर्थियों का बवाल

बीएड काउंसिलिंग सेंटर बना सर छोटू राम इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट आज बवाल का केंद्र बन गया। रिजेक्शन लैटर लेने वहां पहुंचे बीएड अभ्यर्थियों से अभद्रता के साथ फीस ड्राफ्ट बाद में आने के लिए कहा तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों ने सेंटर पर पथराव शुरू कर दिया। वहां जमकर तोड़फोड़ की। घटना में दस कर्मचारी घायल हो गये। सूचना पर पहुंची पुलिस ने अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों पर लाठियां चलाईं तब उनको हटाया जा सका। मामले में दो छात्राओं समेत चार को हिरासत में लिया गया है।

सर छोटू राम इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में बीएड काउंसिलिंग द्वितीय चरण के अंतिम दिन अलॉटमेंट लेटर लेने वालों की सुबह से ही भीड़ लग गई। जिन्हें रिजेक्शन लेटर मिला, उन्होंने फीस ड्राफ्ट वापस करने की मांग की। इस पर उनसे कहा गया कि ड्राफ्ट 20 अक्टूबर को मिलेगा। इस पर सुन अभ्यर्थी व अभिभावक अधीर हो उठे। उसी वक्त कंप्यूटर साइंस विभाग के एक शिक्षक ने अभ्यर्थी से अभद्र व्यवहार किया। इससे अभ्यर्थी और उनके साथ आए अभिभावक भड़क गए। उन्होंने पथराव शुरू कर दिया। ईटें उठाकर शीशों पर दे मारीं। इसके बाद तो हंगामा शुरू हो गया। पथराव से भगदड़ मच गई। देखते ही देखते कंप्यूटर साइंस व आईटी ब्लॉक बिल्डिंग के शीशे चकनाचूर कर दिए गए। साथ ही वहां खड़ी लेक्चरर पियूष बत्रा की इंडिगो कार के शीशे और आसपास की बिल्डिंगों के शीशे भी अभ्यर्थियों के गुस्से का शिकार बने। अभ्यर्थियों ने सेंटर के अंदर फर्नीचर व कंप्यूटर को भी नुकसान पहुंचाया। करीब बीस मिनट तक इंस्टीटयूट युद्ध का मैदान बना रहा। एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह और सीओ पहुंचे तो उन्होंने अभ्यर्थियों और अभिभावकों को दौड़ाया। पुलिस ने उपद्रव करने वाले अभ्यर्थी और उनके अभिभावकों को धर दबोचा। इस की घटना में सेंटर के दस कर्मचारी घायल हुए, जिसमें कुछ महिलाएं भी हैं। मौके पर विवि के चीफ प्रोक्टर योगेंद्र सिंह भी पहुंचे।

बाद में पुलिस ने पूछताछ की और वीडियो फुटेज देखे। इन्हीं फुटेज के आधार पर ही पुलिस ने पत्थरबाजी कर रही नैनीताल की गायत्री, अलीगढ़ की स्वाति, उसके भाई आशीष और राहुल शर्मा को मौके से ही पुलिस पकड़ कर थाने ले गई। पुलिस इस मामले में दूसरे छात्रों की गिरफ्तारी की कोशिश भी कर रही है।

बीएड को-ऑर्डिनेटर प्रो. आईआरएस सिंधू का कहना है रिजेक्शन लेटर के बाद ड्राफ्ट मिलने की प्रक्रिया में तीन दिन का समय लगता ही है। ऐसे में ड्राफ्ट वापस करना उनके हाथ में नहीं है। कुछ अभ्यर्थियों ने अभद्र व्यवहार किया। जब रोका गया तो उन्होंने तोड़ फोड़ शुरू कर दी।
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जब सीटें नहीं थी, तो क्यों बुलाया
पत्थर फेंकने वाले अभ्यर्थी हों या फिर चुपचाप दूर से देखने वाले, हर किसी के मन में एक ही सवाल रहा कि यदि सीटें नहीं थी तो काउंसिलिंग के लिए क्यों बुलाया गया। कई दिनों की भागदौड़ के बावजूद रिजेक्शन की मायूसी ने क्रोध का रूप ले लिया। बात कहीं से भी शुरू हुई हो पर अधिकतर अभ्यर्थियों का गुस्सा अपनी भागदौड़ व थकान के बावजूद कुछ हाथ न आने के कारण फूटा। उस पर भी फीस वापस लेने के लिए उन्हें पांच दिन का और इंतजार करना होगा। इन अभ्यर्थियों को चाहे पांच हजार का ड्राफ्ट पांच और दिन की मेहनत के बाद वापस हो जाएगा, लेकिन पांच सौ रुपए फीस और इतने दिन ठहरने में हुआ खर्च व मानसिक तनाव से छात्रों में गुस्सा भर गया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद काउंसिलिंग में नए कालेज शामिल होने से यूपी में 2200 सीटें बढ़ीं। जबकि एक लाख 60 हजार से दो लाख तीस हजार रेंक तक के अभ्यर्थियों को बुला लिया गया। ऐसे में सर छोटू राम काउंसिलिंग सेंटर में ही केवल 355 अभ्यर्थियों को अलॉटमेंट लेटर मिल पाया। च्वॉइस लॉक करने वाले अन्य 1139 अभ्यर्थियों को रिजेक्शन लेटर मिला। दो दिन च्वॉइस भरने के समय 1955 अभ्यर्थी पहुंचे थे(दैनिक जागरण संवाददाता,15.10.2010)।

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