शहरों में बढ़ रही नक्सली गतिविधियों से निपटने के लिए पुलिस ने जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिसिंग मजबूत करने के लिए ग्राउंड स्तर पर रायपुर पुलिस एक नया नेटवर्क बनाने जा रही है। यह नेटवर्क एसपीओ (स्पेशल पुलिस अफसर) के मुखबीर-तंत्र से तैयार होगा। इसके लिए शहर के थाना स्तर पर 500 से ज्यादा एसपीओ की भर्ती की जाएगी।
आयोध्या फैसले को लेकर पुलिस ने सूचना-तंत्र का जो ग्राउंड तैयार किया था, उसे दोबारा नक्सलियों के खिलाफ सक्रिय किया जा रहा है। पुलिस ने डेढ़ हजार से ज्यादा एसपीओ की हफ्ते भर के लिए नियुक्ति की थी। इन्हीं में से पुलिस अब 500 एसपीओ का चयन करेगी।
थाना स्तर पर उनका रिकार्ड चेक किया जाएगा। उन्हें पुलिस के समक्ष एक औपचारिक इंटरव्यू भी पास करना होगा, जिसके बाद ही एसपीओ जैसे पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पुलिस एसपीओ की सूची तैयार करेगी, जिसकी मानीटरिंग के लिए हर थाने में एक अफसर होगा। एसपीओ सीधे उसी के संपर्क में रहेंगे।
एसपीओ अपने-अपने इलाके के मुखबीर होंगे। वे पुलिस को आसपास समाज में होने वाली तमाम सकारात्मक व नकारात्मक गतिविधियों से अवगत कराते रहेंगे। चोरी, डकैती और गुंडागर्दी जैसे अपराधों के बारे में भी एसपीओ जानकारियां देंगे। उनके इलाके में कोई बाहरी नजर आएगा तो वे उसकी हरकतों पर भी नजर रखेंगे तथा समय-समय पर निकटस्थ थाने को इस बाबत सूचना देते रहेंगे।
महिलाएं भी बन सकती हैं एसपीओ!
एसपीओ में कॉलोनी-मोहल्लों के युवक ही नहीं, घरेलू महिलाएं, कालेज छात्र-छात्राएं, कामकाजी, उद्योगपति, व्यापारी और छोटे-मोटे धंधे करने वाले भी शामिल हो सकते हैं। पत्रकार, डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वकील जैसे बुद्धिजीवियों को भी एसपीओ का हिस्सा बनाया जा सकता है। एसपीओ को एक अस्थाई आईकार्ड प्रदान किया जाएगा।,
दर्जा और अधिकार
- विशेष पुलिस का दर्जा होगा।
- पुलिस को केवल सूचनाएं देंगे।
- विशेष डच्यूटी में होंगे इस्तेमाल है।
- आम आदमी पर पुलिसिंग पर रोक।
- वे किसी तरह की कार्रवाई का भी अधिकार नहीं रखेंगे।
- धमकी या रौब जमाया तो कार्रवाई।
"एसपीओ की नियुक्ति से पुलिस का मुखबीर-तंत्र बेहद मजबूत होगा। हर थाना स्तर पर इसकी नियुक्ति होगी।"
दिपांशु काबरा, एसपी, रायपुर(दैनिक भास्कर,रायपुर,16.10.2010)
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