डीयू में चार माह पूर्व रेडियोधर्मी पदार्थ कोबाल्ट-६० के मामले में शुक्रवार को फिर बवाल खड़ा हो गया। कार्यकारी परिषद के सदस्यों ने जांच के नाम पर लीपापोती करने पर कुलपति प्रो दीपक पेंटल को घेरा। उन्हें बीच बैठक से उठकर जाने को मजबूर कर दिया।
प्रशासन ने शुक्रवार को जांच रिपोर्ट को कार्यकारी परिषद में पेश करने के लिए बैठक बुलाई थी। बैठक शुरू होने पर परिषद के सदस्यों ने सबसे पहले कार्यकाल खत्म होने के बावजूद पद पर बने रहने पर प्रो पेंटल की खिंचाई की। उनकी अध्यक्षता को भी अवैध बताकर विरोध किया। इसके बाद सदस्यों ने जांच कमेटी की वैधता पर भी सवाल खड़े किए। राजीव रे ने बताया कि जांच कमेटी को ईसी की स्वीकृति से गठित नहीं हुई है। ऐसे में यह कमेटी वैध नहीं है। कुलपति प्रो पेंटल ने मनमाने तरीके से तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर खुद को बचाने के लिए इसे गठित की है। यह शिक्षकों को मंजूर नहीं है। सदस्यों के इस विरोध के बीच विजिटर नॉमिनी जावेद चौधरी ने भी सवाल खड़े किए और कहा कि बिना एजेंडे के ही इस रिपोर्ट को ईसी में क्यों रखा गया । डा एससी पांडा ने कोबाल्ट ६० मामले में प्रो पेंटल को भी जिम्मेदार मानते हुए कहा कि एक अभियुक्त होने के नाते वह इस तरह की रिपोर्ट संबंधी बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
सदस्यों ने बताया कि रिपोर्ट में प्रो पेंटल ने खुद को बचाया है और कोबाल्ट मामले में रसायन शास्त्र विभाग को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। इसके तहत १९९३ से अब तक विभाग में जो भी शिक्षक रहे हैं उन्हें जिम्मेदार माना गया है। ईसी सदस्यों के इस विरोध के कारण प्रो पेंटल ने बैठक बीच में स्थगित कर दी और सोमवार को इस पर फिर से बहस के लिए आमंत्रित किया है। उधर, जांच के नाम पर लीपापोती करने पर दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने कुलपति कार्यालय के आगे धरना दिया(नई दुनिया,दिल्ली,2.10.2010)।
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